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अंडमान के बारेन द्वीप में ज्वालामुखी फटा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अंडमान और निकोबार के बारेन द्वीप समूह में भारत का आख़िरी सक्रिय ज्वालामुखी 11 साल बाद फट पड़ा है. अंडमान की राजधानी पोर्ट ब्लेयर से 140 किलोमीटर दूर स्थित यह ज्वालामुखी 11 साल पहले दिसंबर, 1994 में फटा था. यहाँ के निवासियों का कहना है कि 26 दिसंबर को आई सूनामी लहरों के प्रभाव के बाद से इससे धुँआ निकलता देखा गया था. लेकिन अधिकारियों का कहना है कि उन्होंने इस ज्वालामुखी को पिछले सप्ताह से ही सक्रिय होते देखा है. अंडमान के प्रमुख प्रशासनिक अधिकारी डीएस नेगी का कहना है, '' ज्वालमुखी से गर्म लावा और धुँआ निकल रहा है और इसने आसपास के इलाक़े को ढक लिया है.'' ख़तरा नहीं डीएस नेगी का कहना था कि लावा समुद्र में नहीं जा रहा है इसलिए समुद्री जीवजंतुओं को कोई ख़तरा नहीं है. भारतीय तटरक्षकों को शनिवार को इस ज्वालामुखी के सक्रिय होने का पता चला. भारतीय तटरक्षक दल के उप कमाडेंट पंकज वर्मा का कहना है,'' जैसे ही इसका पता चला कुछ तटरक्षक बारेन द्वीप पर पहुँचे. लेकिन जो दृश्य हमने देखा है, वह हम जीवनभर नहीं भूल सकते हैं.'' भारतीय भूगर्भ सर्वेक्षण विभाग के अनुसार बारेन द्वीप समूह में ज्वालामुखी पहली बार 1787 में और आख़िर में 1994 में फटा था. इस क्षेत्र का कत्चाल द्वीप 26 दिसंबर, 2004 को आई सूनामी लहरों में डूब गया था और वहाँ से थोड़े ही लोगों को बचाया जा सका था. |
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