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ज्वालामुखी फिर फटने का ख़तरा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
अमरीका में वैज्ञानिकों का कहना है कि वाशिंगटन राज्य में माउंट सेंट हेलेन्स में आए ताज़ा भयंकर कंपन से संकेत मिलते हैं कि जल्दी ही फिर से ज्वालामुखी फट सकता है. भूगर्भ वैज्ञानिकों ने ज्वालामुख और वहाँ मौजूद गैसों में रविवार को भारी कंपन के संकेतों का पता लगाया है. इन संकेतों के आधार पर कहा गया है कि ज्वालामुखी फटने का पूरा अंदेशा है और इसका स्तर काफ़ी ख़तरनाक होगा जिससे इलाक़े में जानमाल के नुक़सान का भी बड़ा ख़तरा है. वहाँ पिछले शुक्रवार को ज्वालामुखी फटा था और ऐसा 1986 के बाद पहली बार हुआ था. 1980 में भी बहुत भयंकर ज्वालामुखी फटा था जिसमें 57 लोगों की जानें चली गई थीं. रविवार को जो कंपन आया वह क़रीब 25 मिनट तक रहा लेकिन शनिवार को आए कंपन से कुछ हल्का था. शनिवार को आया कंपन क़रीब एक घंटे तक जारी रहा था. भूगर्भ वैज्ञानिकों ने चेतावनी दी है कि इन कंपनों के बाद 24 घंटे के अंदर भी ज्वालामुखी फटने की आशंका है लेकिन यह उतने बड़े पैमाने पर नहीं होगा जितना 1980 में आया भूकंप था. इस कंपन से जो गैसें निकली हैं उनके बारे में प्रयोग करने के लिए वैज्ञानिक पहले से ही वहाँ इकट्ठा हो चुके हैं. कार्बनडाई ऑक्साइड वैज्ञानिकों का कहना है कि उनके उपकरण पहली बार वहाँ के वातावरण में काफ़ी बड़ी मात्रा में कार्बनडाई ऑक्साइड की मौजूदगी दर्ज कर रहे हैं. ऐसा तब होता है जब मैगमा ज़मीन के गर्त से सतह की तरफ़ आता है और कार्बनडाई ऑक्साइड बाहर निकलती है. शुक्रवार को ज्वालामुखी फटने से कुछ धुआँ और राख हज़ारों फुट आकाश में बिखर गई थी. इस कंपन को सैकड़ों लोगों ने देखा और लोगों को यह प्राकृतिक क्रिया काफ़ी रोमांचक भी लगी. |
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