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डायनासोर के अंत के सिद्धांत पर सवाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
वैज्ञानिकों ने उस सिद्धांत पर नए सवाल खड़े किए हैं कि साढ़े छह करोड़ साल पहले डायनासोरों का अंत एक विशाल उल्का पिंड की धरती से टक्कर का परिणाम था. मेक्सिको के युकाटान प्रायद्वीप के पास 180 किलोमीटर चौड़े इस क्रेटर में मौजूद पत्थरों के अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों का मानना है कि डायनासोरों के विलुप्त होने के पीछे उल्का पिंड की टक्कर के अलावा भी अन्य कई कारण रहे होंगे. नए परीक्षण बताते हैं कि मेक्सिको का चिक्सुलुब क्रेटर किसी बड़े उल्का पिंड की टक्कर के चलते बना था, लेकिन डायनासोरों के ख़ात्मे से कोई तीन लाख साल पहले. इसलिए वैज्ञानिकों का मानना है कि उस बड़ी टक्कर के बाद उसी तरह की दो-तीन और टक्करें हुई होंगी. ताज़ा अध्ययन की रिपोर्ट नेशनल एकेडमी ऑफ़ साइंस की बैठक के दौरान प्रकाशित की गई है. अध्ययन अमरीका के प्रिंसटन विश्वविद्यालय के प्रोफ़ेसर गेर्टा केलर की अगुआई में विशेषज्ञों के एक अंतरराष्ट्रीय दल ने किया है. कई और बड़ी टक्करें उल्लेखनीय है कि 1991 में सामने आए इस सिद्धांत को व्यापक मान्यता मिली हुई है कि मेक्सिको के चिक्सुलुब नामक स्थान के पास साढ़े छह करोड़ साल पहले एक विशाल उल्का पिंड आ टकराया था, जिसकी प्रतिक्रियाओं के कारण डायनासोरों का अंत हुआ था. तब वैज्ञानिकों ने दावा किया था कि टक्कर के कारण वायुमंडल में धूल की मोटी परत वर्षों के लिए छा गई होगी, जिसने महीनों तक धरती पर सूर्य की रोशनी नहीं आने देकर पेड़-पौधों को नष्ट कर दिया होगा, धरती शीत काल की चपेट में आ गई होगी, और इन सब कारणों से अंतत: डायनासोरों का अंत हुआ होगा. अब चिक्सुलुब के क्रेटर में पत्थरों के स्तर के विस्तृत अध्ययन के बाद वैज्ञानिकों ने पाया है कि उस टक्कर के बाद कुछ और बड़े उल्का पिंड धरती से टकराए होंगे. प्रोफ़ेसर केलर का मानना है कि उल्का पिंडों की टक्कर के अलावा कई पर्यावरणीय बदलाव और ज्वालामुखी विस्फोट भी डायनासोरों के विलुप्त होने का कारण बने होंगे. उनका अनुमान है कि दूसरा बड़ा उल्का पिंड हिंद महासागर में कहीं टकराया होगा. कई वैज्ञानिकों ने प्रोफ़ेसर केलर के प्रमाणों पर सवाल खड़े किए हैं. |
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