|
'दक्षिणी वज़ीरिस्तान चरमपंथियों से मुक्त' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान की सेना का कहना है कि एक साल तक चली कार्रवाई के बाद अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे दक्षिणी वज़ीरिस्तान से अल क़ायदा के नेटवर्क को पूरी तरह ख़त्म कर दिया गया है. इस सैनिक कार्रवाई का नेतृत्व करने वाले मेजर जनरल नियाज़ खटक ने कहा कि इस कार्रवाई के दौरान 300 से ज़्यादा चरमपंथी मारे गए. उन्होंने दावा किया कि कई चरमपंथियों को ग़िरफ़्तार किया गया है और कई उस इलाक़े से भाग गए हैं. उन्होंने कहा कि चरमपंथियों में ज़्यादातर पाकिस्तान के क़बायली थे. लेकिन इनमें विदेशी चरमपंथी भी बड़ी संख्या में थे. जनरल खटक ने बताया कि सैनिक कार्रवाई में सेना के क़रीब ढाई सौ जवान भी मारे गए. जनरल खटक ने यह भी स्पष्ट किया कि कार्रवाई के दौरान अल क़ायदा प्रमुख ओसामा बिन लादेन का कोई सूराग नहीं मिला. कई बार इस तरह की बातें सामनें आईं थी कि लादेन इसी इलाक़े में छिपे हुए थे. पाकिस्तान की सेना का कहना है कि इस इलाक़े को चरमपंथियों से मुक्त कराने के बाद अब वे यहाँ सड़क, पानी और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं. कार्रवाई अफ़ग़ानिस्तान की सीमा से लगे दक्षिणी वज़ीरिस्तान में सैनिक कार्रवाई क़रीब एक साल पहले शुरू हुई थी. पाकिस्तान के सैनिक कमांडरों का दावा है कि उस समय से उन्होंने चरमपंथियों के तीन कैंप नष्ट किए और 300 से ज़्यादा चरमपंथियों को मार डाला.
जनरल खटक ने बताया कि कार्रवाई में 250 सैनिक भी मारे गए लेकिन अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि कितने आम नागरिक इस दौरान मारे गए. उन्होंने कहा कि इलाक़े के क़बायली एक बार फिर चरमपंथी गतिविधियों में शामिल न हो इसके लिए यहाँ सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं को विकसित करने पर ध्यान दिया जा रहा है. बीबीसी संवाददाता पॉल एंडरसन का कहना है कि भले ही पाकिस्तान सैनिक दक्षिणी वज़ीरिस्तान में सफलता का दावा कर रहे हों, लेकिन माना ये जा रहा है कि सैकड़ों चरमपंथी दक्षिणी वज़ीरिस्तान से भाग कर उत्तरी इलाक़े में शरण लिए हुए हैं. अफ़ग़ानिस्तान स्थित अमरीकी सैनिक कमांडर पाकिस्तानी सेना पर इसके लिए दबाव डाल रहे हैं कि वे उत्तरी वज़ीरिस्तान में भी कार्रवाई शुरू करें. लेकिन पाकिस्तान ने यह कहते हुए यह मांग ठुकरा दी है कि ख़ुफ़िया सूत्र ऐसी कार्रवाई पर ज़ोर नहीं दे रहे हैं क्योंकि चरमपंथी बिखर गए हैं. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||