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सूनामी राहत को लेकर धार्मिक तनाव | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के दक्षिणी राज्य केरल में हिंदू और ईसाई समुदायों के बीच तनाव के कारण सूनामी से जुड़ी राहत सहायता में बाधाएं आ रही हैं. केरल के दक्षिणपंथी हिंदू संगठन इस बात से बेहद नाराज़ हैं कि स्थानीय प्रशासन सूनामी प्रभावितों के लिए किए जा रहे राहत कार्यों में ईसाई संगठनों को भागीदारी करने दे रहा है. उनका आरोप है कि ईसाई संगठन राहत कार्यक्रमों के ज़रिए हिंदूओं का धर्म परिवर्तन करने की कोशिश में है. ईसाई संगठनों ने इन आरोपों को निराधार बताया है. केरल के उत्तरी हिस्से अल्लापाड में सूनामी लहरों ने तबाही मचाई थी और अब यहां राहत कार्यो को लेकर राजनीति ज़ोरों पर है. हज़ारों बेघर पांच महीने पहले जब सूनामी लहरें यहां आईं तो अपने साथ 150 लोगों को बहा ले गई और सैकड़ों घर टूट गए. यहां रहने वाले अधिकतर लोग मछुआरे हैं और वो अब स्थानीय प्रशासन द्वारा बनाए गए अस्थायी घरों में रह रहे हैं. सूनामी के बाद क़रीब 25000 लोग इन अस्थायी घरों में रह रहे हैं.लोगों को हर महीने एक हज़ार रुपए भी दिए जा रहे हैं. धार्मिक समस्या
कुछ हिंदू संगठन राहत सहायता के कार्यों से नाराज़ हैं. हिंदू संगठन एक्यवेदी के नेता कुम्मनम राजशेखर का कहना है " ईसाई संगठनों को अल्लपाड में घर बनाने की अनुमति क्यों दी जा रही है. " उनका आरोप है " ईसाई मिशनरी और संगठन स्थानीय चर्चों से जुड़े हुए हैं और वो राहत सहायता के बहाने हिंदूओं का धर्म परिवर्तन कर रहे हैं." हालांकि स्थानीय प्रशासक बी श्रीनिवास इन आरोपों को ख़ारिज़ करते हैं. वो कहते हैं " हमने इन आरोपों की जांच की है लेकिन ये आरोप आधारहीन हैं." राहत कार्यों से जुड़े लैटिन कैथोलिक चर्च के रोमांस एंटनी राहत कार्यों से जुड़े रहे हैं.उनका कहना है कि चर्च और उनसे जुड़े संगठनों ने हर उस व्यक्ति की मदद की है जो सूनामी से प्रभावित हुआ है और इसका धर्म से कोई लेना देना नहीं है. एंटनी का कहना है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ से जुड़े लोगों ने ये समस्या खड़ी की है. एंटनी कहते हैं " हमने सूनामी प्रभावित इलाक़ों में किसी भी हिंदू का धर्म परिवर्तन नहीं किया है. हम धर्मांतरण में विश्वास नहीं रखते." अल्लपाड हिंदू धार्मिक गुरु माता अमृतानंदमयी का भी घर है और उनके संगठन ने भी सूनामी के दौरान राहत कार्यों में हाथ बंटाया है. हालांकि मठ के स्वामी अमृता स्वरुपानंद इस विवाद से मठ को दूर रखना चाहते हैं. वो कहते हैं " हमने इस इलाक़े में सारे घर बनवाने की पेशकश की थी लेकिन स्थानीय प्रशासन ने कई एजेंसियों को यह काम सौंपा है. " पांच महीने के बाद अब लोग जल्दी से जल्दी अपने स्थायी घर चाहते हैं लेकिन धर्म के नाम पर हो रही राजनीति ने अल्लापड में फिलहाल तनाव फैला दिया है. |
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