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शुक्रवार, 20 मई, 2005 को 11:27 GMT तक के समाचार
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'न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर चल रही है सरकार'

मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी
कांग्रेस का मानना है कि सरकार सही दिशा में आगे बढ़ रही है
यूपीए सरकार ने न्यूनतम साझा कार्यक्रम बनाया था, उसको काफ़ी हद तक पूरा कर दिया गया है.

विपक्ष अपनी संसदीय ज़िम्मेदारी निभाता तो और कुछ विधेयक पारित होते और क़ानून बनते.

लेकिन विपक्ष के टकराव की भूमिका के कारण संसद के कामकाज में काफी बाधा आई.

इसके बावजूद सरकार ने सभी क्षेत्रों में उल्लेखनीय उपलब्धियाँ हासिल की हैं. ख़ासतौर से आर्थिक क्षेत्र में तो पूरे देश में उम्मीद का वातावरण बना है.

विदेश के लोग अब निवेश करना चाहते हैं और वे समझ गए हैं कि आर्थिक सुधारों का दौर जारी रहेगा. हम कोई क्राँतिकारी बदलाव नहीं लाएंगे, जिससे देश में उथल-पुथल हो.

आर्थिक विकास के आँकड़े बहुत ही उल्लेखनीय हैं. महंगाई काबू में है. पेट्रोल की क़ीमत हमने नहीं बढ़ने दी जो काफ़ी उल्लेखनीय है.

दूसरी सफलता हमारी विदेश नीति को लेकर है. विशेषकर हमारे पड़ोसी देश चीन और पाकिस्तान के साथ आपसी हित के मसलों को सुलझाने के लिए बहुत बड़ी पहल हुई है.

संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में भारत का दावा काफ़ी मज़बूत हुआ है.

आर्थिक ताकत

हम आर्थिक ताक़त के रूप में उभर रहे हैं. राजनीतिक क्षेत्र में एक बड़े देश के नाते आगे बढ़ रहे हैं.

तीसरी बड़ी उपलब्धि है कि हमने अर्थव्यवस्था की दिशा को सामाजिक रूप दिया है.

शिक्षा, स्वास्थ्य पर ख़र्च दोगुना किया है. ग्रामीण इलाक़ों पर विशेष ध्यान देने के लिए कृषि ऋण को तीन साल में दोगुना करने का वादा किया है और बैंकिग सुधार पर विशेष ध्यान दिया है.

रोज़गार गारंटी विधेयक पेश करने कोशिश की लेकिन विपक्ष के ग़ैर ज़िम्मेदाराना व्यवहार के कारण विधेयक पारित नहीं हो सका.

और इस एक वर्ष में कोई घपला या घोटाला सामने नहीं आया है.

एक अहम बात यह है कि सरकार और पार्टी दो अलग-अलग जगह से चलाने का प्रयोग देश में बहुत अच्छे ढ़ंग से चल रहा है.

विपक्ष का रवैया सही नहीं रहा है. हम विपक्ष के साथ हर मुद्दे पर चर्चा के लिए तैयार हैं.

लेकिन विपक्ष एक ही मुद्दे को अलग-अलग रूपों में तीनों सत्रों में चलाता रहा और बाधा डालता रहा.

यहाँ तक की रेल और आम बजट बिना चर्चा के पारित हुआ. संसदीय जनतंत्र के लिए यह चिंता का विषय है.

(आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित)

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