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यूपीए सरकार: हर दिन नया विवाद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
यूपीए सरकार का एक वर्ष यानी 365 दिन, 365 से ज़्यादा विवादों को लेकर आया है. इस दौरान कहीं न कहीं लोकतांत्रिक, संवैधानिक और संसदीय परंपराओं के सम्मान को धक्का लगा है. जिस प्रकार से सरकार विपक्ष से एक के बाद एक मुद्दे पर टकराने की कोशिश करती रही है, उससे मज़बूत संसदीय लोकतांत्रिक प्रक्रिया को नुक़सान पहुँचा है. सरकार के कार्यकाल को अगर संक्षेप में कहें तो यूपीए यानी– उल्टा-पुल्टा एलाइंस ही साबित हुआ है. काँग्रेस पार्टी ने सीबीआई जैसी संस्था को काँग्रेस ब्यूरो ऑफ इंवेस्टिगेशन बना दिया है, जो ख़तरनाक है. भारतीय जनता पार्टी इन्हीं सब बातों को सामने रखने के लिए यूपीए सरकार के एक साल पूरा होने पर एक चार्जशीट जारी करेगी. इसमें सरकार की सभी नाकामियों का ब्यौरा होगा. दरअसल इस सरकार की कोई उपलब्धियाँ रही ही नहीं हैं. इसने हर समय संवैधानिक तंत्र और आयोगों का दुरुपयोग करने और राजनीतिक फ़ायदे के लिए साफ़-सुथरी लोकतांत्रिक परंपरा को नुक़सान पहुँचाने की कोशिश की है. विपक्ष के साथ यूपीए सरकार का व्यवहार बहुत ख़राब रहा है. जिस तरीके से यह सरकार चल रही है, उससे तो यही लगता है कि यह पाँच साल भी पूरे कर सकती है. लेकिन जितने दिन यह सरकार चलेगी उससे देश के लोकतंत्र, विकास और संसदीय परंपराओं को नुक़सान होगा. यूपीए सरकार के एक वर्ष के कार्यकाल को देखते हुए मैं इसे शून्य अंक से ज़्यादा नहीं दे सकता. (आशुतोष चतुर्वेदी से बातचीत पर आधारित) |
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