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हिंदुत्व पर लौटने का भाजपा का संकेत | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भाजपा ने एक बार फिर अपने हिंदुत्व और अयोध्या जैसे पुराने मुद्दों पर वापसी का संकेत दिए. भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी ने पार्टी की रजत जयंती के अवसर पर आयोजित राष्ट्रीय परिषद की बैठक में कहा कि पार्टी को लोक सभा चुनावों में पराजय से सबक लेते हुए हिंदुत्व की अपनी जड़ों की ओर लौटना होगा. उन्होंने राम मंदिर के प्रति प्रतिबद्धता दोहराई और राष्ट्रीय सेवक संघ के साथ संबंधों को भी उचित ठहराया. आडवाणी ने कहा कि पार्टी अपने विस्तार पर ध्यान देगी. उनका कहना था कि सबसे बड़ी चुनौती उत्तर प्रदेश में पार्टी को पुनर्जीवित करने की है. उन्होंने भारत में बांग्लादेशी नागरिकों के मुद्दे पर सर्वदलीय बैठक बुलाने की भी मांग की. सबक इसके पहले राष्ट्रीय कार्यकारिणी की बैठक में लालकृष्ण आडवाणी ने कहा था कि लोक सभा चुनावों में पार्टी को अप्रत्याशित रूप से झटका लगा था और पार्टी उससे सबक सीखेगी. अपने अध्यक्षीय भाषण में आडवाणी ने कहा कि कांग्रेस पार्टी की अदूरदर्शिता के कारण देश की एकता और अखंडता को ख़तरा उत्पन्न हो गया है. उनका कहना था कि यदि ऐसी ही नीतियाँ लंबे समय तक जारी रहीं तो देश का क्या होगा, इसको लेकर पार्टी चिंतित है. पार्टी का आकलन है कि यूपीए में दरार पड़ने के प्रारंभिक लक्षण नज़र आने लगे हैं. भाजपा का मानना है कि बिहार, झारखंड में यूपीए के घटक विरोधियों की तरह चुनाव लड़े. इसके अलावा आंध्र प्रदेश में तेलंगाना राष्ट्र समिति और कांग्रेस के बीच तनाव है.और द्रमुक ने तो तमिलनाडु से मंत्रिमंडल में शामिल एक केंद्रीय मंत्री को हटाने मांग की थी. साथ ही वामपंथी दल हर रोज़ सरकार को चेतावनी दे रहे हैं कि उनका समर्थन मजबूरी न समझा जाए. |
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