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भागलपुर दंगा मामले में 10 को उम्र क़ैद | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भागलपुर में 1989 में हुए सांप्रदायिक दंगों के मामले में एक स्थानीय अदालत ने दस अभियुक्तों को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई गई है. इस माममे में 13 अन्य लोगों को दोषमुक्त करार दिया गया है. उस समय दंगों के बाद बनाए गए जाँच आयोग ने अपनी रिपोर्ट में 1981 लोगों की मौत की पुष्टि की थी. ये दंगे रामशिलापूजन के एक जूलूस पर हुए कथित हमले के बाद 24 अक्तूबर 1989 को भड़के थे. गुरुवार को जिन 10 लोगों को अतिरिक्त ज़िला एवं सत्र न्यायाधीश ने सज़ा सुनाई उन्हें गत 9 मई को दोषी ठहराया गया था. मामला जिन लोगों को सज़ा सुनाई गई है उन्हें सुल्तानगंज पुलिस थाने के अंतर्गत कमरगंज गाँव में पाँच लोगों की हत्या में शामिल होने का दोषी पाया गया है. सरकारी वकील ख़ुर्शीद अहमद ने बीबीसी को बताया कि 14 नवंबर 1989 को सैकड़ों लोगों ने कमरगंज गाँव पर हमला कर दिया था. अभियुक्तों पर आरोप था कि उन्होंने गोलियाँ चलाईं, लूटपाट की और घरों में आग लगा दी. सरकारी वकील के मुताबिक़ पुलिस के पहुँचने के बाद ही दंगाई भागे. इस मामले की शिकायत बदरुल इस्लाम ने दर्ज की थी और वे इस मामले में गवाह भी थे. मारे गए लोगों में बदरुल इस्लाम के पिता भी शामिल थे. पुलिस की ओर से इस मामले में 52 लोगों के ख़िलाफ़ नामजद रिपोर्ट दर्ज की गई थी लेकिन जाँच के दौरान 24 लोगों को छोड़ दिया गया. दंगे बीबीसी के बिहार संवाददाता मणिकांत ठाकुर के अनुसार भागलपुर में दंगे तभी हुए थे जब रामशिलापूजन के बाद देश के कई हिस्सों में दंगे भड़के थे. वहाँ दंगों की शुरुआत ततारपुर में एक जुलूस पर हमले के बाद शुरु हुए थे. इन दंगों के बाद पुलिस ने कुल 866 नामजद मामले दर्ज किए थे और अब तक 43 मामलों में 274 लोगों को दोषी पाया गया है और सज़ा सुनाई गई है. 557 मामलों में अंतिम प्रतिवेदन दिया गया है. |
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