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गुजरात दंगों पर कोर्ट की नज़र
सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात की नरेंद्र मोदी सरकार को निर्देश दिया है कि वह सांप्रदायिक दंगों से जुड़े 12 अन्य मामलों में प्रगति पर हलफ़नामा पेश करे. न्यायालय ने बेस्ट बेकरी कांड पर कड़े रुख़ के बाद अब अपना ध्यान अन्य मामलों की ओर भी किया है. मुख्य न्यायाधीश न्यायमूर्ति वीएन खरे, न्यायमूर्ति एसबी सिन्हा और न्यायमूर्ति एआर लक्ष्मणन की खंडपीठ ने राज्य सरकार को निर्देश दिया है कि वह 12 बड़े जनसंहारों के बारे में प्रगति रिपोर्ट सौंपे. इस रिपोर्ट के साथ ही 31 अक्तूबर तक गवाहों के नाम भी देने के लिए कहा है. इसमें से नौ मामले विभिन्न अदालतों में पड़े हैं जबकि तीन अन्य मामलों में ज़्यादातर अभियुक्तों को रिहा करने के फ़ैसले को राज्य सरकार ने अभी तक उच्च न्यायालय में चुनौती नहीं दी है. अदालत ने 'सिटिज़ंस फ़ॉर पीस ऐंड जस्टिस' की तीस्ता सीतलवाड़ की ओर से दायर हलफ़नामे को स्वीकार करते हुए ये आदेश दिया है. उस हलफ़नामे में कहा गया था कि गुजरात सरकार ने अभियुक्तों को छोड़े जाने के मामले में कोई कार्रवाई नहीं की है. उनकी ओर से अपर्णा भट्ट ने हलफ़नामा दायर करते हुए कहा कि गुजरात सरकार ने बेस्ट बेकरी मामले में तो अदालत के निर्देश के बाद कार्रवाई की मगर अन्य मामलों को नज़रअंदाज़ कर दिया गया. खंडपीठ ने अगली सुनवाई के लिए सात नवंबर की तारीख़ तय की है. खंडपीठ ने न्यायालय की मदद के लिए नियुक्त पूर्व सॉलिसिटर जनरल हरीश साल्वे से कहा कि वह बेस्ट बेकरी कांड मामले की प्रगति के बारे में न्यायालय को समय-समय पर अवगत कराते रहें. |
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