|
वायुसेना विमान का मामला गरमाया | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एनडीए सरकार के कार्यकाल में हुए कथित रक्षा घोटाले की जाँच कर रहे आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति फूकन द्वारा वायुसेना के विमान के उपयोग का मामला और गरमाता दिख रहा है. रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने न्यायमूर्ति फूकन द्वारा विमान के उपयोग की पुष्टि करते हुए जो जानकारियाँ दी हैं उससे स्पष्ट होता है कि वे वायुसेना विमान के उपयोग के लिए अधिकृत नहीं थे. और तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस के उपयोग से ही विमान का उपयोग किया गया था. उल्लेखनीय है कि न्यायमूर्ति फूकन ने एक टेलीविज़न चैनल को दिए साक्षात्कार में स्वीकार किया था कि उन्होंने वायुसेना के विमान का उपयोग किया. उनके इस बयान के बाद रक्षामंत्री प्रणव मुखर्जी ने लोकसभा में विपक्ष एनडीए की अनुपस्थिति में यह बयान दिया है. विशेष अनुमति यह यात्रा दिसंबर 2003 में की गई थी और उस समय फूकन आयोग कथित रक्षा घोटाले की जाँच कर रहा था. जैसा कि प्रणव मुखर्जी ने बताया कि जाँच आयोग के सचिव ने रक्षामंत्रालय को एक पत्र लिखकर कहा था कि विभिन्न रक्षा उपकरणो की जाँच के लिए आयोग के अध्यक्ष और अधिकारियों को पुणे, अहमदाबाद, मुंबई और बंगलौर जाना पड़ेगा. उनकी यात्रा की तारीख़ 22 से 27 दिसंबर बताई गई थी. रक्षामंत्री के बयान के अनुसार वायुसेना ने रक्षामंत्रालय से सर्विस विमान के उपयोग की अनुमति प्रदान करने का अनुरोध किया. उन्होंने बताया कि तत्कालीन रक्षामंत्री जॉर्ज फ़र्नांडिस ने इसकी अनुमति प्रदान की. इसके बाद जस्टिस एसएन फूकन ने अपनी पत्नी और आठ अधिकारियों के साथ पुणे, मुंबई और अहमदाबाद और सिरडी की यात्रा की. प्रणव मुखर्जी ने बताया, " आयोग के सदस्यों ने वायुसेना के सर्विस विमान से पुणे की यात्रा की फिर वहाँ से वायुसेना के हेलीकॉप्टर से मुंबई और अहमदाबाद गए. सिरडी की यात्रा सड़क मार्ग से की गई और पुणे से वापस दिल्ली वायुसेना के विमान से ही आए." उन्होंने बताया कि बंगलौर की यात्रा नहीं की गई. अधिकृत प्रणव मुखर्जी ने वायुसेना के विमान के उपयोग के प्रावधानों के बारे में बताया. उन्होंने 1981 में सरकार की ओर से जारी की गई सूची का उल्लेख करते हुए कहा कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री वायुसेना के विमान का उपयोग कर सकते हैं. इन तीनों के अलावा उपलब्धता के आधार पर रक्षामंत्री, गृहमंत्री, सेना के तीनों प्रमुख, रक्षाराज्य मंत्री, रक्षा सचिव और रक्षा विभाग से जुड़े कुछ अधिकारी सरकारी कार्यों के लिए इसका उपयोग कर सकते हैं. उन्होंने बताया कि निर्देश ये हैं कि जहाँ तक संभव हो सरकारी कार्यों के लिए नियमित व्यावसायिक विमान का उपयोग किया जाना चाहिए. प्रणव मुखर्जी ने स्पष्ट किया कि राष्ट्रपति, उपराष्ट्रपति और प्रधानमंत्री के अलावा शेष लोगों को वायुसेना विमानों के उपयोग के लिए भुगतान करना होता है. हालांकि रक्षामंत्री मुखर्जी ने फूकन के विमान के उपयोग के बारे में कुछ नहीं कहा लेकिन उनके बय3न से ज़ाहिर होता है कि सूची के अनुसार जस्टिस फूकन वायुसेना के विमान के उपयोग के लिए अधिकृत नहीं थे. प्रणव मुखर्जी के बयान के बाद सत्तापक्ष के लोग इस पर चर्चा करना चाहते थे लेकिन लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी ने इसकी अनुमति नहीं दी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||