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मुआवज़े बाँटने के लिए एक साल और | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सर्वोच्च न्यायालय ने भोपाल गैस पीड़ितों को मुआवज़ा बाँटने की अवधि अगले साल 30 अप्रैल तक बढ़ा दी है. इससे पहले अपने एक आदेश में सर्वोच्च न्यायालय ने 1503 करोड़ रुपए का मुआवज़ा तीन महीने के भीतर बाँटने के आदेश दिए थे लेकिन कल्याण आयुक्त के अनुरोध पर इसकी अवधि बढ़ा दी गई है. 20 साल की लंबी लड़ाई के बाद भोपाल के गैस पीड़ितों को गत वर्ष जुलाई में सफलता मिली थी और यूनियन कार्बाइड द्वारा जमा की गई राशि को गैस पीड़ितों में ही बाँटने का आदेश दिया गया था. कल्याण आयुक्त ने सर्वोच्च न्यायालय से मुआवज़ा बाँटने की अवधि बढ़ाने का अनुरोध करते हुए कहा था कि चूंकि इसके वितरण के लिए पर्याप्त जज उपलब्ध नहीं हैं इसलिए मुआवज़ा वितरण की गति बहुत धीमी है. उन्होंने सर्वोच्च न्यायालय को सूचना दी थी कि तीन महीनों में सिर्फ़ 224 करोड़ रुपयों का मुआवज़ा वितरित किया जा सका है. सर्वोच्च न्यायालय ने अपने आदेश में कहा है कि पहली मई 2005 के बाद एक साल में मुआवज़ा वितरित कर दिया जाए और मुआवज़ा वितरण के बारे में हर तीन महीने में एक रिपोर्ट अदालत को दी जाए. उल्लेखनीय है कि मुआवज़े को लेकर राजनीतिक खींचतान होती रही है. |
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