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शोक सभाएं होती रहीं, मुआवज़ा नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोपाल में घटी पिछली शताब्दी की सबसे भयानक औद्योगिक त्रासदी को बीस साल पूरे हो गए हैं. गैस पीड़ितों के शोक में शहर में छुट्टी मनाई गई लेकिन सारी दुकानें खुली रहीं और सुबह से ही सड़को पर यातायात आम दिनों की ही तरह व्यस्त रहा. ऐसा लग रहा था कि पूरा शहर बीस साल पहले हुए बुरे हादसे को भुलाने की कोशिश कर रहा है. स्टेशन रोड पर स्थित ओवरब्रिज के नीचे क़रीब पचास लोग जमा है. कुछ विदेशी चेहरे भी दिख जाते हैं जो यूनियन कार्बाइड को सजा दो जैसे बैनर पोस्टर के साथ खड़े थे. पास ही खड़ी एक लड़की से मैंने जब पूछा कि इस रैली में इतने कम लोग क्यों आए हैं तो उसका कहना था कि अंतिम समय में रैली का स्थान बदल दिया गया इसलिए लोग आ नहीं पाए. थोड़ी ही दूर पर लड़कों का एक समूह बैठा था तो मैं खिसक कर उधर चला गया. लड़कों के जवाब से कि आज भोपाल त्रासदी की बरसी है मन को लगा कि भोपालवासियों की याद इस घटना के बारे में ताजी है. तभी एक बुर्जुग पास आ गए और बोले कि इनसे क्या पूछ रहे हो जो 20 साल के भी नहीं हुए हैं. हमसे पूछो, हमें तो जो मुआवजा दिया गया वो भी भीख की तरह मिला. तभी साइकिल पर सवार एक और युवक आया. उम्र 20-22 साल. नाम श्रवण.मंदिर के पास दुकान लगाने वाले श्रवण को कुछ भी नहीं पता था भोपाल त्रासदी की बरसी के बारे में. इन जवाबों से मन में सवाल उठ रहे थे कि इनमें से किसे सच मानूं. इधर डेढ़ घंटे पहले लोगों को तलाश रहा जूलूस लंबा हो गया है. तकरीबन 400 लोग जमा हो गए थे. किनारे खड़े होकर देखने वालों की संख्या ज्यादा थी. ऐसी कई शोक सभाएं हो रही हैं , सरकारी और निजी तौर पर. सरकारी सभा तो यूनियन कार्बाइड परिसर के बाहर ही हुई और बाकी सभाएं किसी न किसी शक्ल में वहां तक पहुंची. इसी परिसर के बाहर किसी ने मुझे चुन्नीलाल के बारे में बताया. तंग गलियों और सड़कों के साथ लगी गंदगी से बचता हुआ गली नंबर नौ पहुंचा, गैस के रिसाव से सबसे बुरी तरह प्रभावित इलाक़ा. मुझे चुन्नीलाल के घर जाना था उनकी विधवा से मिलने. चुन्नीलाल की तस्वीर पर जलते दीए और चटाई पर बैठी उनकी विधवा सावित्री बाई के निकट ही बैठ गया मैं भी. रोते रोते सावित्री ने यही कहा कि क्या तस्वीरें ही खिंचते रहोगे. सावित्री देवी को अभी तक कोई मुआवजा नहीं मिला है और उनके बेटे की भी मौत हो चुकी है गुरुवार को अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड के कारखाने से हुई गैस लीक के शिकार हुए कुछ लोगों और मृतकों के रिश्तेदारों ने कारखाने के गेट के सामने प्रदर्शन किया और शोकसभा भी हुई. बीस साल पहले इसी दिन चालीस टन ज़हरीली गैस कारखाने से लीक हो गई थी. ग़ुस्सा लोगों में ग़ुस्सा था क्योंकि बहुत सारे लोग अब भी गैस लीक के परिणाम भुगत रहे हैं.
माना जाता है कि इस त्रासदी के कारण मारे जाने वालों की संख्या 18 हज़ार है जबकि हज़ारों अन्य लोग अब भी कई बीमारियों के शिकार हैं. कारखाने में अब भी अनुमानित 25 हज़ार टन ज़हरीले पदार्थ हैं. मध्यप्रदेश की सरकार का कहना है कि उसने उस जगह का सर्वेक्षण करने के आदेश दिए हैं. गैस लीक के शिकार हुए लोगों के पक्ष में लड़ाई लड़ रहे स्वयंसेवी संगठन और कार्यकर्ता कहते हैं कि अमरीकी कंपनी प्रभावित लोगों और रिश्तेदारों को मुआवज़ा देने की अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई. इस कंपनी को डाउ केमिकल्स नामक कंपनी ने ख़रीद लिया है और उसका कहना है कि जब त्रासदी हुई तो कंपनी ने अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी. लेकन वह अब भी यही कहती है कि ये त्रासदी तोड-फोड़ के मक़सद से की गई किसी कार्रवाई के कारण हुई. |
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