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बर्मा ने प्रयोग किए " रासायनिक हथियार" | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
एक अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार संगठन ने बर्मा पर देश के विद्रोहियों के ख़िलाफ़ रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल करने का आरोप लगाया है. संगठन का दावा है कि यह घटना फरवरी के महीने में थाइलैंड से लगती बर्मा की सीमा पर हुई है. क्रिश्चियन सॉलिडैरिटी वर्ल्डवाइड का कहना है कि बर्मा ने स्थानीय कैरन विद्रोहियों पर रासायनिक हथियारों का इस्तेमाल किया जिसके बाद ये विद्रोही उल्टी करने लगे और चलने फिरने में असफल हो गए. संगठन का कहना है कि उसके पास ऐसे सबूत हैं जिनसे साबित हो सकता है कि बर्मा ने रासायनिक हथियारों का प्रयोग किया. बर्मा की सैनिक सरकार के ख़िलाफ़ वर्षों से लड़ाई कर रहे कैरन विद्रोहियों के अनुसार सीमा पर बर्मा के सैनिकों के साथ उनकी लड़ाई छिड़ी जिसमें उन पर ऐसे हथियारों से हमला किया गया जिनसे पीला धुआं जैसा कुछ निकल रहा था. विद्रोहियों के अनुसार इन हथियारों का हमला होते ही सभी कैरन विद्रोही खून की उल्टियां करने लगे और चलने फिरने में असफल हो गए. बाकी कई विद्रोहियों के शरीर पर बाद में फफोले पड़ गए और उन्हें डायरिया की शिकायत हुई. क्रिश्चियन सॉलिडैरिटी वर्ल्डवाइड के अध्यक्ष और डॉक्टर मार्टिन पैंटर का कहना है कि वो इन इलाक़ों में गए हैं और पांच लोगों की जांच भी की है. पैंटर के अनुसार इन लोगों के जख्मों को देखकर लगता है कि इन पर किसी रासायनिक हथियार का प्रयोग किया गया है. ब्रिटेन के विदेश विभाग ने कहा है कि वो इन आरोपों को गंभीरता से ले रहा है और इन आरोपों की जांच की जाएगी. |
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