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मंगलवार, 30 नवंबर, 2004 को 08:28 GMT तक के समाचार
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भारतीय विद्रोही गुटों पर बर्मा की कार्रवाई
उल्फ़ा
उल्फ़ा का भी पूर्वोत्तर राज्यों में प्रभाव है
भारतीय सेना का कहना है कि बर्मा सरकार ने अपनी ज़मीन से भारतीय विद्रोही गुटों के ठिकाने को नष्ट करने के लिए सैनिक कार्रवाई शुरू की है.

पिछले एक महीने से क़रीब छह हज़ार भारतीय सैनिक बर्मा की सीमा से लगे पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर में अलगाववादियों के ख़िलाफ़ कार्रवाई में जुटे हैं.

पिछले महीने भारत की यात्रा के दौरान बर्मा के सैनिक शासक थान श्वे ने वादा किया था कि वे अलगाववादियों के ख़िलाफ़ संघर्ष में भारत की सहायता करेंगे.

भारत के सात पूर्वोत्तर राज्यों में मणिपुर भी ऐसा राज्य है जो अलगाववादी हिंसा से प्रभावित रहा है.

बीबीसी संवाददाता सुबीर भौमिक ने बताया है कि बर्मा ने भारतीय अलगाववादियों के ठिकाने पर शुरू की जाने वाली सैनिक कार्रवाई के बारे में भारत को पहले ही जानकारी दे दी थी.

भारत के रक्षा मंत्री प्रणव मुखर्जी ने उम्मीद जताई है कि इस साल के अंदर ही बर्मा से भारतीय विद्रोही गुटों के ठिकाने नष्ट कर दिए जाएँगे.

उधर भारतीय सैनिकों ने भी दावा किया है कि उन्होंने मणिपुर में चल रही कार्रवाई के दौरान विद्रोही गुटों के 30 से ज़्यादा कैंप नष्ट किए हैं.

लेकिन विद्रोही गुटों का कहना है कि उन्होंने सिर्फ़ अपने छोटे ठिकानों को छोड़ा है ताकि बर्मा की सीमा से लगे साजित टंपक इलाक़े में अपने मुख्य ठिकाने को और मज़बूत बना सकें.

नुक़सान

चार सप्ताह से चल रही भारतीय सैनिकों की कार्रवाई के दौरान दोनों पक्षों ने दावा किया है कि उन्होंने एक-दूसरे को भारी नुक़सान पहुँचाया है.

कोलकाता में सैनिक अधिकारियों ने बताया है कि साजित टंपक और पड़ोसी चूरचंदपुर इलाक़े में सैनिक कार्रवाई जारी रहेगी और कार्रवाई में ज़्यादा सैनिकों को लगाया जाएगा. माना जाता है कि इसी इलाक़े में विद्रोहियों के सबसे ज़्यादा ठिकाने हैं.

हालाँकि दो प्रमुख विद्रोही गुटों यूनाइटेड नेशनल लिबरेशन फ़्रंट (यूएनएलएफ़) और पीपुल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) ने सैनिक कार्रवाई के दावे को ख़ारिज कर दिया है.

यूएनएलएफ़ के प्रवक्ता टोंबी सिंह ने बताया, "हम साजित टंपक और चूरचंदपुर में अपने ठिकाने पर क़ब्ज़ा बनाए हुए हैं."

पीएलए के प्रवक्ता का भी कहना है कि उनके मुख्य ठिकाने पूरी तरह सुरक्षित हैं. भारत के पूर्वोत्तर इलाक़े में 200 से ज़्यादा जातीय और जनजातीय समुदाय है.

इस इलाक़े में 20 से ज़्यादा विद्रोही गुट ज़्यादा स्वतंत्रता और अधिकारों की मांग को लेकर लड़ाई लड़ रहे हैं.

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