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सू ची को नज़रबंद रखने की अवधि बढ़ी | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बर्मा में लोकतंत्र समर्थक विपक्ष की नेता आंग सांग सू ची एक साल और नज़रबंद रहेंगी. उनकी पार्टी ने सोमवार को ये जानकारी दी. मई 2003 में सू ची समर्थकों और सरकार समर्थक सैनिकों के बीच हुई झड़प के बाद सू ची को उनके घर में ही नज़रबंद कर दिया गया था. सू ची को एक साल और नज़रबंद बनाए रखने की ख़बर ऐसे समय आई है जब बर्मा की सरकार ने नौ हज़ार क़ैदियों को रिहा करने की घोषणा की है. सरकार ने सू विन को नया प्रधानमंत्री भी नियुक्त किया है. आंग सांग सू ची की पार्टी नेशनल लीग फॉर डेमोक्रेसी (एनएलडी) के प्रवक्ता यू ल्विन ने बताया कि पुलिस सू ची के घर आई थी और उन्हें बताया गया कि उन्हें नज़रबंद रखने की अवधि और बढ़ाई जा रही है. उन्होंने बताया कि एनएलडी को लगता है कि सू ची को सितंबर 2005 तक नज़रबंद रखा जा सकता है. संघर्ष सू ची को मई 2003 में उनके समर्थकों और सरकारी सैनिकों के बीच भिड़ंत के बाद बंदी बनाया गया था. उस समय उन्हें एक जेल में रखा गया था. लेकिन उनकी तबियत ख़राब होने के कारण उसी साल सितंबर से उन्हें उनके घर में ही नज़रबंद रखा जाने लगा. सू ची को नज़रबंद रखने की अवधि बढ़ाने की ख़बर ऐसे समय आई है जब सू विन को देश का नया प्रधानमंत्री नियुक्त किया गया है. सू विन को सू ची का विरोधी माना जाता है. जानकार तो वर्ष 2003 में सरकारी सैनिकों और सू ची समर्थकों के बीच हुई झड़प के पीछे भी सू विन का हाथ ही मानते हैं. नोबेल पुरस्कार विजेता सू ची इससे पहले भी दो बार नज़रबंद रखी गईं थी. पहली बार तो उन्हें 1989 और 1995 के बीच छह साल के लिए नज़रबंद रखा गया था. जबकि दूसरी बार उन्हें 20 महीनों के लिए नज़रबंद रखा गया था और उन्हें मई 2002 में रिहा किया गया था. लेकिन एक साल बाद फिर उन्हें नज़रबंद कर दिया गया. सू ची की मांग रही है कि देश का सैनिक शासन पहले हज़ारों राजनेताओं को रिहा करे और वे रिहा होने वाली आख़िरी व्यक्ति होना चाहतीं हैं. सू ची की पार्टी ने 1990 में भारी बहुमत से जीत हासिल की थी लेकिन उन्हें कभी भी सत्ता संभालने नहीं दिया गया. बर्मा का शासन 1962 से ही सैनिक सरकार के हाथ है. |
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