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वाजपेयी अपने बयान से पलटे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी भाजपा अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी के संबंध में दिए अपने बयान से पलट गए हैं और उन्होंने कहा कि उनके बयान का गलत अर्थ लगाया गया है. वाजपेयी ने कहा कि वो चाहते हैं कि आडवाणी पद पर बने रहें. इसके पहले वाजपेयी के बयान को लेकर विवाद उठ खड़ा हुआ था जिसमें उन्होंने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रमुख केएस सुदर्शन की राय का समर्थन किया था. जिसमें उन्होंने था कि अधिक उम्र के नेताओं को सेवानिवृत हो जाना चाहिए. वाजपेयी ने पहले कहा था कि वे ख़ुद तो किसी पद पर नहीं हैं और पद से हटने का फ़ैसला पार्टी अध्यक्ष लालकृष्ण आडवाणी को और पार्टी को करना है. पूर्व प्रधानमंत्री ने बयान जारी कर कहा है कि उनके जवाब का गलत अर्थ निकाला गया. उन्होंने कहा,'' मैंने कुछ भी ऐसा नहीं कहा जिससे आडवाणी के पार्टी अध्यक्ष बने रहने पर विवाद हो. हम चाहते हैं कि वो भविष्य में भी पार्टी का नेतृत्व करते रहें.'' इधर भाजपा की ओर से भी सफ़ाई आई है और कहा गया कि आडवाणी के बदले जाने का प्रश्न ही नहीं है. भाजपा के वरिष्ठ नेता जसवंत सिंह ने पत्रकारों से बातचीत में कहा,'' आडवाणी जब तक अपना कार्यकाल पूरा नहीं कर लेते तब तक उन्हें बदले जाने का सवाल ही नहीं उठता. पार्टी में इस पर कोई विचार नहीं हो रहा है.'' 'अच्छा परामर्श' उल्लेखनीय है कि एक टेलीविज़न चैनल को दिए गए साक्षात्कार में संघ के प्रमुख सुदर्शन ने सलाह दी थी कि अटलबिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी दोनों की उम्र अधिक हो गई है और अब उन्हें सेवानिवृत हो जाना चाहिए. सुदर्शन ने सलाह दी थी कि पार्टी की ज़िम्मेदारी अब अपेक्षाकृत युवा लोगों को सौंप देनी चाहिए. संघ प्रमुख सुदर्शन की सलाह पर प्रतिक्रिया पूछने पर वाजपेयी ने संसद परिसर में मंगलवार को पत्रकारों से कहा, "अच्छा परामर्श है." उन्होंने अपने सेवानिवृत्ति के बारे में कहा, "मैं किसी पद पर नहीं हूँ और पहले से ही कोई काम नहीं कर रहा हूँ." और भाजपा अध्यक्ष आडवाणी के बारे में पूछे गए एक सवाल के जवाब में कहा, "आडवाणी जी पद पर हैं, वो फ़ैसला करेंगे, पार्टी फ़ैसला करेगी." |
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