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मनमोहन से मिलना चाहते हैं हुर्रियत नेता | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीरी अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस का मीरवायज़ उमर फ़ारूक़ के नेतृत्व वाला धड़ा कश्मीर मुद्दे पर भारत-पाकिस्तान वार्ता में शामिल होना चाहता है. हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस ने पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की तीन दिवसीय भारत यात्रा के दौरान उनसे मुलाकात करने का अनुरोध किया था. इस दल को बताया गया है कि वे 17 अप्रैल को दिल्ली में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से बातचीत कर सकते हैं. राष्ट्रपति मुशर्रफ़ दिल्ली में भारत-पाकिस्तान वनडे देखने 16 अप्रैल को भारत आ रहे हैं लेकिन उन्होंने स्पष्ट किया है कि उनकी प्राथमिकता कश्मीर मुद्दे पर बातचीत करने की होगी. अब श्रीनगर में हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस की एक उच्चस्तरीय बैठक के बाद इस संगठन ने भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से मिलाकात करने का अनुरोध किया है. 'कश्मीरियों को शामिल करो' मीरवायज़ उमर फ़ारूक़ का कहना है कि वे प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अनुरोध करना चाहते हैं कि कश्मीरी नेताओं को भी कश्मीर पर भारत-पाकिस्तान बातचीत में शामिल किया जाए. उनका कहना था, "हम भारत और पाकिस्तान के बीच हो रही बातचीत का समर्थन करते हैं. हम विश्वास बढ़ाने के लिए उठाए गए कदमों और श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा के भी हक़ में हैं." मीरवायज़ उमर फ़ारूक़ का कहना था, "हम दोनो देशों की सरकारों को बताना चाहते हैं कि कश्मीरी नेताओं को विश्वास में लिए बिना कश्मीर समस्या का समाधान करने में कोई प्रगति नहीं हो सकती." उनका कहना था कि कश्मीर के राजनीतिक और चरमपंथी नेतृत्व को इस प्रक्रिया में शामिल किया जाना चाहिए. लेकिन उनका कहना था कि भारत सरकार के साथ उनका संगठन तब ही बातचीत करेगा जब उनके नेताओं को पाकिस्तानी कश्मीर जाने और वहाँ के राजनीतिक और चरमपंथी नेताओं से बातचीत करने की अनुमति दी जाएगी. उनका कहना था कि हुर्रियत कॉन्फ़्रेंस भारत और पाकिस्तान के बीच नियंत्रण रेखा को स्थायी सीमा बनाए जाने के किसी भी प्रस्ताव का विरोध करेगी. |
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