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बस सेवा की शुरूआत की सराहना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
संयुक्त राष्ट्र महासचिव कोफ़ी अन्नान और अमरीका ने श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा शुरू होने की सराहना की है. कोफ़ी अन्नान ने बस सेवा शुरू होने को शांति की दिशा में एक मज़बूत प्रयास बताया. संयुक्त राष्ट्र के एक प्रवक्ता ने कहा, "कोफ़ी अन्नान ने आशा जताई है कि इस महत्वपूर्ण क़दम से दोनों विभाजित इलाक़ों के लोगों की स्थिति बेहतर होगी और भारत-पाकिस्तान के मसले हल हो सकेंगे". अमरीकी विदेश मंत्रालय ने बस सेवा को दोनों देशों के लिए आगे की ओर एक बड़ा क़दम बताया. अमरीकी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रिचर्ड बाउचर ने कहा, "कश्मीरी यात्रियों की सराहना की जानी चाहिए जिन्होंने इस ऐतिहासिक यात्रा को कामयाब बनाया". वहीं भारत में अमरीका के राजदूत डेविड मलफ़ोर्ड ने भारत और पाकिस्तान को बधाई देते हुए कहा,"आज का दिन भारत, पाकिस्तान और उससे भी अधिक नियंत्रण रेखा के दोनों ओर के कश्मीरियों के लिए एक ऐतिहासिक दिन है". रूसी विदेश मंत्रालय ने भी एक बयान जारी कर बस सेवा शुरू होने का स्वागत किया है और इसे भारत-पाकिस्तान के बीच जारी शांति प्रक्रिया के प्रभावी होने का एक विश्वसनीय प्रमाण बताया. यात्री इस बीच गुरूवार को मुज़फ़्फ़राबाद से श्रीनगर पहुँचे पाकिस्तानी नियंत्रण वाले कश्मीर के 29 यात्रियों का श्रीनगर पहुँचने पर ज़ोरदार स्वागत हुआ. इन यात्रियों को लेकर बस साढ़े आठ बजे के आस-पास श्रीनगर पहुँची तो वहाँ उनके स्वागत के लिए जुटे लोगों के अतिरिक्त उनके सगे-संबंधी भी मौजूद थे जिनसे वे बरसों बाद मिले. इसके बाद यात्रियों को कन्वेंशन सेंटर ले जाया गया जहाँ उनके लिए एक विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम की व्यवस्था की गई थी. श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना है कि इस अवसर पर कई लोगों ने बाहर पटाखे भी छोड़े जिससे कई लोग तो ये समझ बैठे कि कहीं कोई चरमपंथी हमला हुआ है.
अल्ताफ़ हुसैन ने बताया कि कार्यक्रम के बाद आधी रात को तीन-चार यात्री तो अपने संबंधियों के घर चले गए मगर अधिकतर यात्रियों ने रात एक होटल में सरकारी मेहमानों की तरह बिताई. बस यात्रा पर विशेष समझा जा रहा है कि मुज़फ़्फ़राबाद से श्रीनगर आए यात्री 27 अप्रैल को वापस लौट जाएँगे. दूसरी तरफ़ श्रीनगर से 19 यात्री जब मुज़फ़्फ़राबाद पहुँचे तो उनका भी कुछ श्रीनगर के ही अंदाज़ में भरपूर स्वागत किया गया. |
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