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शुक्रवार, 08 अप्रैल, 2005 को 11:12 GMT तक के समाचार
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मीडिया में 'अमन के कारवाँ' की तारीफ़
भारतीय समाचारपत्र
भारतीय समाचारपत्रों ने बस यात्रा की भरपूर प्रशंसा की है
श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद के बीच बस सेवा ने जो उत्साह लोगों में जगाया, तक़रीबन वैसा ही उत्साह मीडिया में भी नज़र आया है. दोनों देशों के अख़बारों में बस यात्रा को काफ़ी प्रमुखता मिली है.

भारतीय अख़बारों ने तो प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन सरकार के प्रयासों की तारीफ़ में पुल बाँधे हैं.

हिंदी दैनिक 'हिंदुस्तान' में शीर्षक है, 'आधी सदी के रंज को मिले ख़ुशी के लम्हे.'

अख़बार ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की प्रशंसा करते हुए कहा है कि मनमोहन सिंह और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी राष्ट्रीय संकल्प के वाहक बने हैं.

साथ ही अख़बार ने एक अन्य शीर्षक लगाया है - 'गर्मजोशी के माहौल में मिले कश्मीरी आवाम.'

दैनिक जागरण ने शीर्षक लगाया है - 'मिटी दूरियाँ, सच हुए सपने.' जागरण लिखता है कि आज़ादी के बाद से रिश्तों के तमाम उतार चढ़ाव देख चुके भारत और पाकिस्तान के बीच 'अमन के कारवाँ' यानि बस सेवा शुरू होने के साथ ही मानो इतिहास के रुके हुए पहिए एक बार फिर चल पड़े.

नवभारत टाइम्स ने शीर्षक लगाया है - 'बुरी नज़र वालों का मुँह हुआ काला.' अख़बार ने लिखा है, 'आतंकवादियों की धमकी का कोई असर नहीं हुआ है और अमन की राह पर नए सफ़र का आगाज़ हुआ है.'

नवभारत टाइम्स ने लिखा है कि शेरो - शायरी के माहौल में शुरु हुआ सफ़र. अख़बार ने मनमोहन सिंह के उस शेर का हवाला दिया है जो उन्होंने बस रवाना करने से पहले पढ़ा था.

शेरो-शायरी
 जिस ख़ाक के ज़मीर में हो आतिशे चिनार, मुमकिन नहीं कि सर्द हो वो ख़ाके अरजुमंद
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह

उन्होंने कहा था, "जिस ख़ाक के ज़मीर में हो आतिशे चिनार, मुमकिन नहीं कि सर्द हो वो ख़ाके अरजुमंद."

जनसत्ता का शीर्षक है, 'नई उम्मीदों को लेकर बढ़ा अमन का कारवाँ.' अमर उजाला ने शीर्षक लगाया है कि कारवाँ-ए-अमन ने पाटी दूरियाँ.

अंग्रेज़ी दैनिक 'हिंदुस्तान टाइम्स' ने शीर्षक लगाया है, वेट आइज़, स्माइल्स एंड हग्स एट एलओसी यानी नियंत्रण रेखा पर भीगी पलकें, मुस्कुराहट के बीच मिलन.

द हिंदू ने सीधा शीर्षक लगाया है - 'बसेस टू मुज़फ़्फ़राबाद फ्लेग्ड ऑफ़' यानी मुज़फ़्फ़राबाद बस को हरी झंडी.

इंडियन एक्सप्रेस की हेडिंग है- 'टू बसेस, 49 पैसेंजर्स, हिस्ट्री.' यानी दो बसें, 49 यात्री और इतिहास.

राजनीतिक प्रयास

पाकिस्तान के अख़बार डॉन का संपादकीय है कि दोनों ओर के कश्मीर के बीच और भी रास्ते खुलने चाहिए.

यात्री
मुज़फ़्फ़राबाद पहुँचकर भावुक हो उठे श्रीनगर से चले यात्री

संपादकीय में लिखा है कि ये क़दम कश्मीर समस्या को सुलझाने के राजनीतिक प्रयासों का स्थान नहीं ले सकते हैं.

डॉन का कहना है कि हर पखवाड़े बस सेवा चलनी चाहिए.

इस बीच गुरूवार को मुज़फ़्फ़राबाद से श्रीनगर पहुँचे पाकिस्तानी नियंत्रण वाले कश्मीर के 29 यात्रियों का श्रीनगर पहुँचने पर ज़ोरदार स्वागत हुआ.

इन यात्रियों को लेकर बस जब श्रीनगर पहुँची तो वहाँ उनके स्वागत के लिए जुटे लोगों के अतिरिक्त उनके सगे-संबंधी भी मौजूद थे जिनसे वे बरसों बाद मिले.

बस यात्रा पर विशेष

यात्रियों का उत्साहश्रीनगर की तरफ़ से
श्रीनगर से चली बस में यात्रियों का उत्साह देखते ही बनता था.
मुज़फ़्फ़राबाद से श्रीनगर बसमुज़फ़्फ़राबाद से बस
मुज़फ़्फ़राबाद से बस चली तो लोग नियंत्रण रेखा छूने को आतुर थे.
कश्मीर नौजवानकश्मीरी युवाओं की राय
कश्मीरी नौजवान क्या सोचते हैं श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस के बारे में.
सफ़र की तैयारी
श्रीनगर से मुज़फ़्फ़राबाद बस सेवा के लिए की गई तैयारियों की तस्वीरें.
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