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पार्टियों और हुर्रियत ने भी निंदा की | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
श्रीनगर-मुज़फ़्फ़राबाद बस यात्रा की पूर्व संध्या पर हुए चरमपंथी हमले की राजनीतिक दलों ने एक सिरे से निंदा की है और कहा है कि इससे यात्रा को लेकर उत्साह बढ़ेगा. सभी ने कहा है कि जो कुछ हुआ है वह तो होना ही था मसला सिर्फ़ यह था कि यह हमला कब और कहाँ होता है. केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा है कि अमरीका से लेकर ब्रिटेन और कई विकसित देशों में भी इस तरह के हमले होते ही हैं. उनका कहना था,"चरमपंथ एक वास्तविकता है और अब हमको इस वास्तविकता के साथ ही जीना होगा." उनका कहना था कि इसे सुरक्षा व्यवस्था में ख़ामी की तरह नहीं देखा जाना चाहिए क्योंकि यह तो होना ही था. जम्मू कश्मीर कांग्रेस के अध्यक्ष रहे ग़ुलाम नबी आज़ाद ने कहा,"यह चरमपंथियों की हताशा का प्रतीक है और इससे वे दो-चार,सौ-पचास लोग जो चरमपंथियों के साथ थे वे भी उनसे दूर हो जाएँगे." उमर फ़ारुख़ नेशनल कांफ़्रेंस के अध्यक्ष और पूर्व केंद्रीय मंत्री उमर फ़ारुख ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि उनके लिए यह आसान होगा कि वे मुफ़्ती मोहम्मद सईद सरकार की ग़लतियाँ निकालकर कह दें कि सुरक्षा व्यवस्था में ख़ामियाँ थीं लेकिन ये ग़लतियाँ निकालने का समय नहीं है. उन्होंने कहा,"अगर ग़लतियाँ थीं भीं तो उसके बारे में हम बाद में चर्चा करेंगे अभी तो बस को जाना चाहिए." उन्होंने एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा,"अभी तो बस पहली बार जा रही है और प्रधानमंत्री, सोनिया गाँधी रवाना करने के लिए आ रहे हैं लेकिन ये सरकार को सोचना होगा कि आगे की सुरक्षा कैसे दी जाएगी." महबूबा मुफ़्ती जम्मू कश्मीर में सत्तारुढ़ पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी की अध्यक्ष महबूबा मुफ़्ती ने कहा कि चरमपंथ में जिन लोगों के निहित स्वार्थ है वे लोग नहीं चाहते कि बस सेवा शुरु हो. उन्होंने कहा कि इस तरह के चरमपंथी हमले जितने होंगे इस तरह के प्रयास करने का माद्दा बढ़ता जाएगा. उन्होंने कहा,"इस तरह की कोशिशों से कुछ नहीं होगा और बस ज़रुर जाएगी, अगर ज़रुरत पड़ी तो मैं और उमर फ़ारुख़ दोनों बस में बैठकर जाएँगे." हुर्रियत ऑल पार्टी हुर्रियत कांफ़्रेस के एक धड़े के प्रमुख सैयद अहमद जिलानी ने इस हमले की निंदा नहीं की है. उन्होंने कहा है कि जो लोग इस बस से जाना चाहते हैं वे लोग कश्मीर के उन हज़ारों लोगों का अपमान कर रहे हैं जिन्होंने इसके लिए अपनी जान दी है. उन्होंने कहा कि वे बस यात्रा का इसलिए विरोध कर रहे हैं क्योंकि उनको लगता है कि ये भारत सरकार की साज़िश है कि इसी तरह नियंत्रण रेखा को अंतरराष्ट्रीय सीमा रेखा बनाकर जम्मू कश्मीर को भारत का हिस्सा बना लिया जाए. |
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