|
कांग्रेस आरजेडी के साथ, पासवान नाराज़ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
बिहार में कांग्रेस ने लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को समर्थन की चिट्ठी दे दी है. बुधवार को लालू यादव ने दावा किया कि कार्यवाहक मुख्यमंत्री और आरजेडी विधायक दल की नेता राबड़ी देवी जल्दी ही सरकार बनाने का दावा करेंगी. इसे लोक जनशक्ति पार्टी नेता रामविलास पासवान के लिए बड़ा झटका समझा जा रहा है. दिल्ली से लौटकर ख़ासे नाराज़ नज़र आ रहे पासवान ने कहा कि जब विभिन्न दलों के नवनिर्वाचित 141 विधायकों ने राज्यपाल को ये पत्र सौंप दिया है कि वे आरजेडी का समर्थन नहीं करेंगे तो ऐसे में कांग्रेस की इस चिट्ठी का कोई मतलब नहीं है. पासवान ने कहा,"ये सब एक नौटंकी है जो बिल्कुल नहीं चलनेवाली". उन्होंने कहा कि उनकी पार्टी किसी भी सूरत में सदन में आरजेडी की सरकार का विरोध करेगी. कांग्रेस आलाकमान के आरजेडी को सहयोग देने का फ़ैसला प्रदेश इकाई को भी रास नहीं आया है और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष रामजतन सिन्हा ने इसे जनता की भावना के विपरीत बताया है. समर्थन बिहार में कांग्रेस ने लालू यादव की पार्टी राष्ट्रीय जनता दल को समर्थन की चिट्ठी दे दी है. लालू यादव ने पटना में पत्रकारों को कांग्रेस में बिहार के प्रभारी हरिकेष बहादुर की ओर से मिली चिट्ठी दिखाई जिसकी एक प्रति राज्यपाल बूटा सिंह को भी भेजी गई है. इस चिट्ठी में कहा गया है कि कांग्रेस के 10 विधायक आरजेडी का समर्थन करेंगे. लालू यादव ने कहा कि उन्हें बहुजन समाज पार्टी के दो, राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के तीन और सीपीआईएम के एक विधायक के समर्थन की चिट्ठी मिल गई है. उन्होंने कहा कि सीपीआई अपने तीन विधायकों के समर्थन की चिट्ठी गुरूवार को उन्हें सौंपेगी. समीकरण 243 सदस्यों वाली विधानसभा में आरजेडी के 75 विधायक चुनकर आए हैं. ऐसे में उसके तमाम समर्थकों की संख्या जोड़ दी जाए तो भी ये आँकड़ा सरकार बनाने लायक ज़रूरी 122 सदस्यों के समर्थन से काफ़ी पीछे रहता है. मगर लालू यादव दो आधार पर सरकार बनाने का दावा कर रहे हैं. एक तो ये कि चुनाव पूर्व गठबंधन के आधार पर उनके गुट को सबसे अधिक सीटें मिली हैं. दूसरा ये कि उनकी पार्टी चुनाव में सबसे बड़े दल के तौर पर उभरी है और अतीत में ऐसा हुआ है कि सबसे बड़ी पार्टी को न्यौता दिया जाए. मौजूदा स्थिति पर प्रेक्षकों की राय ये है कि जिस तरह से झारखंड में यूपीए को सरकार बनाने के लिए आमंत्रित किया गया है उसी तरह से से बिहार में भी ये फ़ैसला दोहराया जा सकता है. प्रेक्षक मानते हैं कि बिहार में भी समर्थन के सबूतों को ताक पर रखकर आरजेडी को सरकार बनाने का मौक़ा दिया जा सकता है और ऐसे में सदन में बहुमत साबित करने का मौक़ा देने से एक बार फिर ख़रीद-फ़रोख़्त देखने को मिल सकता है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||