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हिमस्खलन में 30 से अधिक लोग मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत प्रशासित कश्मीर में पुलिस अधिकारियों का कहना है कि हिमस्खलन के कारण शनिवार से 30 से ज़्यादा लोग मारे गए हैं और 30 लोग लापता हैं. कश्मीर में सालों बाद इतना हिमपात हुआ है. अधिकारियों ने जम्मू-श्रीनगर राजमार्ग पर सड़क ठीक करने का काम करने वाले चार लोगों की मौत की पुष्टि कर दी है. जम्मू कश्मीर में तीन दिन से हो रही भारी बर्फ़बारी से जनजीवन अस्तव्यस्त हो गया है. राज्य में कहीं कहीं तो तीन-तीन मीटर बर्फ़ जमा होने की ख़बरें है. बर्फ़बारी के कारण रास्ते बंद हो गए हैं और जम्मू से श्रीनगर राजमार्ग पर हज़ारों वाहन फँसे हुए हैं. पर्यटकों को भी अपने होटलों में रहना पड़ रहा है. उधर जम्मू में भूस्खलन के बाद वैष्णो देवी की यात्रा को भी शनिवार को रोकना पड़ा था. लेकिन अब यात्रा बहाल कर दी गई है. 20 साल बाद श्रीनगर से बीबीसी संवाददाता अल्ताफ़ हुसैन का कहना था कि हालाँकि मौसम विभाग कह रहा है कि ऐसी बर्फ़बारी तीन साल पहले भी हुई थी लेकिन श्रीनगर के लोगों को याद नहीं आता कि पिछले 20 सालों में कभी ऐसी बर्फ़बारी हुई. उनका कहना है कि लोग याद कर रहे हैं कि 1986 में ऐसी बर्फ़बारी हुई थी. श्रीनगर में इस समय भी बर्फ़ गिर रही है. एक ओर तो प्रशासन सड़कों से बर्फ़ हटाने की कोशिश कर रहा है दूसरी ओर बर्फ़ फिर जमती जा रही है. दो दिनों से लगभग सभी दुकानें बंद हैं.
ज़्यादातर इलाक़ों में बिजली की सप्लाई भी ठप्प है. अधिकारियों को चिंता है कि यदि बिजली की आपूर्ति शुरु नहीं हुई तो पीने का पानी लोगों तक पहुँचाना मुश्किल हो जाएगा. हिमपात के कारण श्रीनगर और जम्मू को जोड़ने वाले 300 किलोमीटर लंबे राजमार्ग को बंद करना पड़ा है. ख़बर है कि क़रीब चार हज़ार यात्री गुरुवार से ही इस रास्ते में फँसे हुए हैं. क़रीब ढाई किलोमीटर लंबी जवाहर सुरंग के पास 13 फ़ीट की ऊँचाई तक बर्फ की पट्टी बन गई है. बीबीसी संवाददाता का कहना है कि सब कुछ ठप्प हुए अभी दो दिन हुए हैं और फ़िलहाल चिंता की कोई स्थिति नहीं है. |
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