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लखनऊ में शिया-सुन्नी संघर्ष में तीन मरे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
उत्तर प्रदेश की पुलिस का कहना है कि राजधानी लखनऊ में शिया और सुन्नी मुसलमानों के बीच संघर्ष में तीन लोगों की मौत हो गई है और कई घायल हैं. हिंसा की घटना पुराने लखनऊ के हुसैनाबाद इलाक़े में हुई. संघर्ष के दौरान कई दूकानें और घर जला दिए गए. स्थानीय प्रशासन ने हुसैनाबाद इलाक़े में कर्फ़्यू लगा दिया है. उत्तर प्रदेश सरकार के प्रमुख गृह सचिव आलोक सिन्हा का कहना था, "स्थिति नियंत्रण में है और दोनो सांप्रदायों के धार्मिक नेता इसमें सक्रिय सहयोग दे रहे हैं. कर्फ़्यू इसलिए लगाया गया है कि तनाव और न बढ़े." पथराव और लूटपाट संघर्ष उस समय शुरू हुआ जब शिया मुसलमान मुहर्रम के मौक़े पर ताज़िया निकाल रहे थे. कुछ सुन्नी मुसलमानों ने इसका विरोध किया और कथित रूप से जुलूस पर पत्थर फेंके. बाद में दोनों ओर से पथराव शुरू हो गया. कुछ लोगों ने दूकानों और घरों को जलाना शुरू कर दिया और लूटपाट भी शुरू हो गई. प्रत्यक्षदर्शियों का कहना है कि कुछ घरों की छत से गोलीबारी भी की गई. हिंसा में तीन लोग मारे गए. घटना की सूचना मिलते ही ज़िला अधिकारी वहाँ पहुँच गए और लोगों को शांत करने की कोशिश की. एक पुलिस अधिकारी ने बताया कि पुलिस शहर के अन्य हिस्सों में ताज़िया के जुलूस के साथ हैं. लखनऊ रेंज के पुलिस महानिरीक्षक सुल्खान सिंह ने बताया कि स्थिति नियंत्रण में है. वरिष्ठ सुन्नी ने नेता खालिद रशीद और शिया नेता कल्बे जव्वाद ने लोगों से संयम बरतने की अपील की है. शिया और सुन्नी मुस्लिम समुदायों में कई दशकों से झड़पें होता आई हैं लेकिन 1998 में दोनो पक्षों के बीच एक समझौता हुआ था जिसके तहत शांति कायम रखने के लिए कुछ कदम उठाने पर सहमति हुई थी. दोनो पक्षों के धार्मिक नेताओं ने ताज़ा हिंसा के बाद दोहराया कि वे 1998 के समझौते पर कायम हैं. |
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