| नगा वार्ता पर आशंका के बादल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
नगा नेताओं और केंद्र सरकार के बीच वार्ता अभी चल ही रही है लेकिन नगा नेता टी मुइवा ने सरकार पर अपने वादे से मुकरने का आरोप लगाया है. नगा नेता एनएससीएन (आईएम) के महासचिव टी मुइवा का कहना है कि इसकी वजह से वार्ता मुश्किल होती जा रही है और भारत सरकार पर विश्वास करना कठिन होता जा रहा है. मुइवा का कहना है, "भारत सरकार अपने वादे से मुकर रही है और इसी रवैये के कारण हम सरकार पर भरोसा करना कठिन लगता है." ध्यान रहे है कि इसी बातचीत के लिए टी मुइवा और इसाक स्वु भारत आए हुए हैं. मुइवा ने बीबीसी से, "वार्ता बिना किसी शर्ते के शुरु हुई थी लेकिन अब सरकार हमारे ऊपर शर्तें लाद रही है. वह कह रही है कि एकीकरण का कोई सवाल नहीं है. तो इसका हल क्या है? इस मुद्दे को हम कैसे भूल सकते हैं, हम इसी के लिए तो लड़ रहे हैं." नगा आंदोलनकारी चाहते हैं कि पूर्वोत्तर में एक वृहत नगालैंड बना दिया जाना चाहिए. मुइवा ने मीडिया में छपी इन ख़बरों का खंडन किया कि नगा नेता असम, अरुणांचल और मणिपुर के हिस्से अलग करके वृहत नगालैंड का निर्माण करना चाहते हैं. उन्होंने कहा, "हम कहना चाहते हैं कि मणिपुर के मैती आदिवासियों ने हमारी ज़मीन ग़लत ढंग से ले ली. उनके पास सिर्फ़ इंफ़ाल था." उनका कहना है कि नगा किसी से कुछ नहीं माँग रहे हैं बल्कि वे सिर्फ़ वही चाहते हैं जो उनका अपना है. उन्होंने बातचीत में कहा कि यदि सरकार नगाओं की और इतिहास की इज़्ज़त नहीं करती तो कोई चर्चा नहीं होगी और न कोई युद्द विराम होगा. मुइवा ने कहा कि नगा पिछले पचाल सालों से भारतीय सेना के साथ सिर्फ़ इसलिए लड़ते रहे क्योंकि नगालैंड का विभाजन कर दिया गया और यह नगाओं को स्वीकार्य नहीं है. |
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