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शनिवार, 12 फ़रवरी, 2005 को 15:08 GMT तक के समाचार
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बात निकलेगी तो जात तक जाएगी

गंगा पार करने के लिए बना अस्थायी पुल
ऐसी पार की जाती है नदी
बिहार के राघोपुर विधानसभा क्षेत्र से राष्ट्रीय जनता दल की प्रत्याशी राबड़ी देवी जीत के प्रति आश्वस्त दिखती हैं पर इस विश्वास की वजह काम नहीं, जातीय समीकरण है.

क्षेत्र के लगभग डेढ़ लाख मतदाताओं में आधे वोट यादव जाति के हैं जो हमेशा से इस क्षेत्र में प्रत्याशी के भाग्य का फ़ैसला करते रहे हैं.

क्षत्रिय परिवारों के यहाँ तकरीबन 45 हज़ार वोट हैं और बाकी अन्य जातियों के.

ऐसे में चुनाव एकतरफ़ा ही रहता है और आरजेडी के लिए जीत की डगर आसान बनी रहती है. इसी जातीय समीकरण के आधार पर यहाँ के लोग राबड़ी देवी की लड़ाई को आसान मान रहे हैं.

हालाँकि इस क्षेत्र की दुर्दशा को देखते हुए विकास यहाँ सबसे बड़ा मुद्दा हो सकता था पर सब कुछ जातीय समीकरणों के इर्द-गिर्द तय होता नज़र आ रहा है.

हम बोलेगा तो...

जब हमने राघोपुर के एक क्षत्रिय बहुल गाँव,चकसिंगार में जाकर लोगों से बात की उनमें से कोई भी बात करने को तैयार नहीं हुआ.

हैंडपंप
हैंडपंप तो है लेकिन पानी नहीं आता

नाम न बताने की शर्त पर उनमें से एक ने कहा, अगर आपके सामने मुँह खोला तो हमारी जुबान हमेशा के लिए बंद कर दी जाएगी.

उन्होंने आरोप लगाया कि पूरा क्षेत्र विकास की दृष्टि से उपेक्षित है पर ऐसे गाँवों को ख़ासतौर पर सुविधाओं से दूर रखा जाता है, जो क्षत्रिय बहुल हैं.

ऐसे ही एक सेवानिवृत्त सैनिक बताते हैं, हमारे घरों के तमाम लोग अन्य शहरों में काम कर रहे हैं. वो मतदान के दौरान यहाँ नहीं रहते पर जाँच करें तो पता चलेगा कि उनके नाम से भी वोट पड़ चुका है.

वो चुनाव के एकपक्षीय होने के पीछे इसे एक बड़ी वजह बताते हैं.

कैसे पार हो बैतरणी

राघोपुर में जाने के लिए गंगा पार करनी पड़ती है पर गंगा पार करने के लिए पीपे वाला अस्थायी पुल ही एक मात्र ज़रिया है. बरसात के दिनों में ये पुल हटाना पड़ता है जिससे लोगों को ख़ासी परेशानी होती है सो पुल एक बड़ा मुद्दा है पर लोगों के मुताबिक पक्का पुल केवल कागजों में है, हकीकतन सामने नहीं आ रहा.

इसके अलावा सड़क, स्कूल, अस्पताल जैसी कितनी ही ज़रूरतों से क्षेत्र को लोग वंचित हैं. इस बाबत क्षेत्र के एक मतदाता, भगवान राय बताते हैं, ऐसा नहीं है कि मुख्यमंत्री ने विकास के लिए पैसा नहीं दिया पर जो भी पैसा आया है, वो स्थानीय दलालों के चलते जनता तक नहीं पहुँचता.

लोग यहाँ राजद से पिछला चुनाव जीतकर विधानसभा पहुँचे भोला राय से ख़ासे नाख़ुश भी दिखे.

हालाँकि क्षेत्र के कई सरकारी भवनों की दीवारें ग्रामीण विकास योजनाओं से पटी पड़ी हैं पर लोगों के मुताबिक यह चुनाव से पहले की तैयारी है वरना योजनाएँ तो दूर, अधिकारी भी कभी-कभी क्षेत्र में आते हैं.

पर इतने सब सवालों के बाद भी विकास यहाँ चुनावी मुद्दा नहीं है. हालाँकि कई यादव जाति के लोगों ने भी राजद और लालू प्रसाद यादव के प्रति असंतोष जताया पर घूम-फिर कर बात, जात पर जा कर रुक जाती थी.

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