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पाकिस्तान लेगा भारत से सीख | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जब बंदूकों की ज़ुबान बंद होती है, तो कई नए रास्ते खुलते हैं. ऐसे रास्ते जो शायद कभी नक्शे पर रहे हों लेकिन बारूद के धुएं में नज़र नहीं आते. भारत और पाकिस्तान के बीच कुछ ऐसा ही हो रहा है. दूरियों को मिटाने के लिए जब लाहौर बस की शुरूआत हुई तो दो साल की पाकिस्तानी बच्ची को बैंगलोर तक का रास्ता मिला जहाँ दिल का इलाज करवा कर उसे नई ज़िंदगी मिली. अब पाकिस्तान के कुछ डॉक्टर भारत आ रहे हैं एड्स के ख़िलाफ़ लड़ने का प्रशिक्षण लेने. वहाँ के अधिकारियों का कहना है कि वो इस क्षेत्र में भारत के अनुभव का लाभ उठाना चाहते हैं. पाकिस्तान में सरकारी आंकड़ों के अनुसार लगभग तीन हज़ार लोग एड्स या एचआईवी से प्रभावित हैं लेकिन समझा जाता है कि वास्तविक संख्या कहीं ज़्यादा है. पाकिस्तान के राष्ट्रीय एड्स नियंत्रण प्रोग्राम की मैनेजर अस्मा बुख़ारी का कहना है कि पांच डॉक्टरों और पांच नर्सों की टीम इसी महीने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ़ सोशल साइंसेज़ का दौरा करेगी. एक समाचार एजेंसी के साथ बातचीत में उन्होंने कहा, "काफ़ी छानबीन के बाद पाकिस्तान ने इस प्रशिक्षण के लिए भारत को चुना क्योंकि एचआईवी और एड्स पर नियंत्रण रखने में और उसके रोगियों को सही सहायता पहुँचाने में भारत ने अच्छा अनुभव हासिल कर लिया है." अस्मा बुख़ारी ने कहा कि पाकिस्तान में इस रोग के फैलने की दर भारत के मुक़ाबले कहीं कम है लेकिन स्वास्थ्य अधिकारियों का कहना है कि पूरे देश में कम से 70,000 से 80,000 लोग इसकी चपेट में आ चुके हैं. उन्होंने कहा, "आने वाले दिनों में इस महामारी के फैलने का पूरा ख़तरा है." भारत में एचआईवी एड्स से प्रभावित लोगों की संख्या पचास लाख के करीब मानी जाती है जो पूरी दुनिया में दक्षिण अफ़्रीका के बाद सबसे ज़्यादा है. इसी हफ़्ते भारत ने पहली बार एड्स के टीके का मानव परीक्षण किया. जबसे भारत और पाकिस्तान शांति प्रयासों में तेज़ी आई है, दोनों पक्षों ने कई क्षेत्रों में आदान प्रदान बढ़ाया है. |
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