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सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री? | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री रमन सिंह को सर्वश्रेष्ठ मुख्यमंत्री घोषित करने के बाद उस सर्वेक्षण पर सवाल खड़े किए जा रहे हैं जिसके आधार पर ये नतीजे निकाले गए हैं. इस नतीजे पर विपक्षी दलों और सामाजिक कार्यकर्ताओं ने कहा है कि लोकप्रियता तय करते हुए सरकार के कामकाज को भी ध्यान में रखना चाहिए. दूसरी ओर सरकार का कहना है कि कामकाज के आधार पर ही लोकप्रियता तय हुई है. साप्ताहिक पत्रिका 'इंडिया टुडे' के लिए एसी नेल्सन-ओआरजी मार्ग ने यह सर्वेक्षण किया है. पत्रिका का कहना है कि मुख्यमंत्री रमन सिंह सहज और सरल व्यक्ति हैं, उनकी छवि एक साफ़ सुथरे राजनीतिक नेता की है. उन्होंने राज्य में पिछले दिनों निवेश का माहौल तैयार किया है और उनकी सरकार की योजना ग़रीबोन्मुख रही हैं. पत्रिका का कहना है कि डॉ सिंह के मुख्यमंत्री रहते हुए ही योजना आयोग ने छत्तीसगढ़ की योजना राशि में पिछले वर्ष के मुक़ाबले 29 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी की है. उसके अलावा पत्रिका में उनके तकनीक प्रेम आदि का भी ज़िक्र किया गया है. आपत्तियाँ 'इंडिया टुडे' के इस सर्वेक्षण के आधार पर क्या डॉ रमन सिंह को लोकप्रिय मुख्यमंत्री मान लिया जाए, इस सवाल पर रायपुर के पत्रकार रुचिर गर्ग कहते हैं, "मुख्यमंत्री की लोकप्रियता के लिए जो सर्वक्षण हुआ है उसका आधार स्पष्ट नहीं है. इसका आधार बताया जाना चाहिए." उनका कहना है, "यदि एक राजनेता की लोकप्रियता देखनी है तो उसका आधार यह होना चाहिए कि उसने जनहित में कितनी योजनाएँ बनाईं, इस योजना पर अमल किस तरह हुआ और उसके कार्यकाल में मानव विकास इंडेक्स में क्या सकारात्मक परिवर्तन आए. लेकिन इस सर्वेक्षण के नतीजों में इस सबका कोई ज़िक्र नहीं है." रुचिर गर्ग का कहना है कि सीधे सरल व्यक्तित्व के कारण किसी मुख्यमंत्री को लोकप्रिय नहीं मान लेना चाहिए क्योंकि इससे पहले के मुख्यमंत्री अजीत जोगी इसलिए लोकप्रिय थे क्योंकि वे काफ़ी तेज़ तर्रार थे, इसलिए मुख्यमंत्री की लोकप्रियता उनके कामकाज से नापी जानी चाहिए. लोकप्रियता के ही सवाल पर सामाजिक कार्यकर्ता सुदीप श्रीवास्तव का कहना है कि वे इसे बुनियादी रुप से सही नहीं मानते कि अलग-अलग परिस्थितियों में काम कर रहे अलग-अलग राजनीतिक पार्टियों के मुख्यमंत्रियों की तुलना की जाए. उनका कहना है, "मैं तो सर्वेक्षण पर ही सवाल उठाना चाहता हूँ क्योंकि पत्रिका इसी तरह के सर्वेक्षण करती रही है और पिछली बार जिन पाँच लोगों को सबसे लोकप्रिय बताया गया था उनमें से कई बुरी तरह चुनाव हार गए. छतीसगढ़ इसका सबसे अच्छा उदाहरण है क्योंकि अजीत जोगी पाँचवे सबसे लोकप्रिय मुख्यमंत्री थे और वे चुनाव हार गए. यानी या तो सर्वेक्षण ग़लत हैं या फिर लोगों को अक़्ल नहीं है." वे मानते हैं कि यह ठीक है कि मुख्यमंत्री डॉ सिंह की तुलना अगर अजीत जोगी से की जाए तो वे बेहतर मुख्यमंत्री हैं क्योंकि उन्होंने जनता को यह विश्वास दिलाया है कि वे लोगों के निजी जीवन में हस्तक्षेप नहीं करेंगे, जैसा कि अजीत जोगी कर रहे थे. लेकिन वे कहते हैं कि अगर कामकाज और राज्य के हित में निर्णयों का सवाल है तो इस सरकार में भी कोई दृष्टि दिखाई नहीं देती. विपक्ष की नाराज़गी इंडिया टुडे के सर्वेक्षण से विपक्षी दल कांग्रेस स्वाभाविक रुप से नाराज़ है.
उनके पास गिनाने के लिए दर्जनों चीज़ें हैं. विधानसभा ने विपक्ष के उपनेता भूपेश बघेल का आरोप है, "जो मुख्यमंत्री केंद्र से मिली राशि का उपयोग न कर पा रहे हों और जिनकी सरकार बजट राशि का चालीस प्रतिशत राशि का उपयोग न कर पा रही हो वे सबसे लोकप्रिय कैसे हो सकते हैं." जोगी सरकार में राहत कार्य मंत्री रह चुके बघेल कहते हैं, "सरकार ने ख़ुद 126 में से 87 ब्लॉकों को सूखाग्रस्त घोषित किया हुआ है लेकिन अब तक एक भी ब्लॉक में राहत कार्य शुरु नहीं किए जा सके हैं." वे पूछते हैं कि आदिवासियों और किसानों के लिए कोई योजना न देने वाली सरकार के मुखिया सबसे लोकप्रिय कैसे हो सकते हैं. बचाव विपक्ष के आरोपों का खंडन करते हुए राज्य के गृहमंत्री बृजमोहन अग्रवाल का कहना है कि छत्तीसगढ़ सरकार ने आदिवासियों और अनुसूचित जाति के लोगों के लिए अच्छी योजनाएँ दी हैं. उनका कहना है कि न केवल योजना आयोग ने बल्कि रिज़र्व बैंक ने भी योजना राशि के उपयोग को लेकर छत्तीसगढ़ राज्य की तारीफ़ की है. ब्रजमोहन अग्रवाल ने एक सवाल के जवाब में कहा कि जो मुख्यमंत्री लोकप्रियता के बावजूद चुनाव में हार गए वे सिर्फ़ इसलिए हारे क्योंकि वह सर्वेक्षण चुनाव के समय हुए थे. वे छत्तीसगढ़ में हुए इस सर्वेक्षण को पुराने सर्वेक्षणों से अलग मानते हैं क्योंकि इस समय चुनाव नहीं हैं. |
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