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भारत-पाक वार्ताः कश्मीर पर प्रगति नहीं | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीर मसले पर बिना किसी प्रगति के भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की दो दिवसीय बातचीत ख़त्म हो गई है. बातचीत के दूसरे दिन भी कश्मीर पर बातचीत हुई लेकिन कोई ठोस प्रगति नहीं हो पाई. हालाँकि बातचीत के दूसरे दिन दोनों पक्षों की ओर से संयुक्त घोषणापत्र ज़रूर जारी हुआ. भारत की ओर से विदेश सचिव श्याम सरन और पाकिस्तान के विदेश सचिव रियाज़ ख़ोखर बातचीत का नेतृत्व कर रहे थे. संयुक्त घोषणापत्र में कहा गया है कि भारत और पाकिस्तान रचनात्मक वातावरण में बातचीत जारी रखेंगे. पाकिस्तान के विदेश सचिव रियाज़ ख़ोखर ने प्रेस काँफ़्रेंस में माना कि कश्मीर को लेकर अभी भी दोनों पक्षों में मतभेद क़ायम है. सहमति लेकिन दोनों पक्ष इस बात पर सहमत थे कि वे एक-दूसरे के यहाँ बंदी बनाए गए मछुआरों, आम नागरिकों और सुरक्षा कर्मियों के बारे में एक-दूसरे को जानकारी देंगे. पहले दोनों देश एक-दूसरे पर आरोप लगाते थे कि उन्होंने ग़ैर क़ानूनी रूप से उनके नागरिकों को बंदी बना कर रखा है. दोनों पक्ष इस बात पर भी सहमत थे बंदियों की पहचान और दूसरी प्रक्रियाओं के बाद जल्द ही उन्हें वापस भेज दिया जाएगा. दोनों विदेश सचिवों ने इस साल जनवरी में शुरू हुई शांति प्रक्रिया की प्रगति की भी समीक्षा की. ऐसा पहली बार हुआ कि शांति प्रक्रिया शुरू होने के बाद दोनों पक्षों ने कश्मीर पर भी बातचीत की. क्योंकि दोनों देशों के बीच विवाद का प्रमुख विषय भी कश्मीर ही है. पाकिस्तान ने बातचीत शुरू होने पर सबसे पहले भूकंप में समुद्री लहरों से पैदा हुए संकट और उसमें मारे गए हज़ारों लोगों के प्रति सहानुभूति प्रकट की. पाकिस्तान ने भारत को राहत कार्य में सहायता देने की भी पेशकश की. बातचीत में दोनों पक्षों ने यह भी संदेश देने की कोशिश की कि कश्मीर पर बातचीत ज़रूरी है लेकिन इसके कारण बाक़ी के मुद्दे पर चल रही वार्ता रुकनी नहीं चाहिए. |
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