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सुप्रीम कोर्ट पहुँचे शंकराचार्य | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांचीपीठ के शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती ने मंगलवार को ज़मानत के लिए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की. शंकराचार्य ने अपनी याचिका में मद्रास हाईकोर्ट के उस फ़ैसले को चुनौती दी है जिसमें हाईकोर्ट ने ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी थी. शंकराचार्य पर मठ के पूर्व कर्मचारी शंकर रमण की हत्या और एक भक्त राधाकृष्णन पर क़ातिलाना हमले के दो मामलों में न्यायिक हिरासत में हैं. उन्हें 11 नवंबर को गिरफ़्तार करने के बाद से वेल्लूर जेल में रखा गया है. सुप्रीम कोर्ट में दायर अपनी याचिका में शंकराचार्य ने कहा है कि हाईकोर्ट ने उनकी ज़मानत याचिका पर सुनवाई के दौरान तमिलनाडु पुलिस के आरोपों के बारे में कोई सुनवाई नहीं की और पप्पू यादव के मामले में सुप्रीम कोर्ट के एक निर्णय को आधार बनाकर ज़मानत याचिका ख़ारिज कर दी. हाईकोर्ट ने अपने फ़ैसले में कहा था कि इस मामले में ज़मानत देना उसके अधिकार क्षेत्र में नहीं आता. शंकराचार्य ने कहा है कि तमिलनाडु पुलिस अब तक उन पर लगाए गए आरोपों का कोई आधार पेश नहीं कर सकी है इसलिए उन्हें ज़मानत दी जानी चाहिए. इससे पहले एक बार शंकराचार्य ज़मानत के लिए सुप्रीम कोर्ट जाने से इंकार कर दिया था. दो याचिकाएँ खारिज उधर सुप्रीम कोर्ट ने शंकराचार्य को ज़मानत देने और हत्या का मामला तमिलनाडु पुलिस से लेकर सीबीआई को देने के लिए लगाई गई दो अलग-अलग याचिकाएँ ख़ारिज कर दीं. कोर्ट ने कहा है कि दोनों याचिकाएँ जिन लोगों ने दायर की हैं उनका इस मामले से कोई लेना देना नहीं है. |
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