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मंगलवार, 07 दिसंबर, 2004 को 20:00 GMT तक के समाचार
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शंकराचार्य के समर्थन में अख़बारी विज्ञापन

शंकराचार्य जयेंद्र सरस्वती
शंकराचार्य के समर्थकों ने उन पर लगाए गए आरोपों पर सफ़ाई देने की कोशिश की है
करीब एक महीने से कांची पीठ के शंकराचार्य जयेन्द्र सरस्वती हत्या और हत्या की कोशिश के दो अलग-अलग मामलों में वेल्लोर जेल में हैं.

तमिलनाडु सरकार का कहना है कि शंकराचार्य अगर रिहा किए गए तो वो जाँच की प्रक्रिया और गवाहों को प्रभावित कर सकते हैं.

सरकारी वकील ने पिछले दिनों में अदालत में शंकराचार्य पर कई आरोप लगाए हैं और मीडिया में कई ऐसी ख़बरे आई हैं जिनकी पुष्टि नहीं हुई है.

अब शंकराचार्य के समर्थकों ने इन आरोपों और बयानों पर सफ़ाई देने के लिए मीडिया का सहारा लिया है.

मंगलवार को दक्षिण भारत के समाचार पत्रों में एक पूरे पृष्ठ के विज्ञापन के ज़रिए उन्होंने एक-एक आरोप का जवाब दिया है.

"कोई भी क़ानून से बड़ा नहीं है, सत्य की जीत हो और दोषी को सज़ा हो."

शंकराचार्य के बयान के इस शीर्षक वाले विज्ञापन में एक-एक करके सरकारी वकील के आरोपों और मीडिया में छपी ख़बरों का खंडन किया गया है.

विज्ञापन

विज्ञापन में कहा गया है कि इन आरोपों पर चुप्पी साधना अब ठीक नहीं होगा.

उनका कहना है कि किसी की प्रतिष्ठा और एक संस्थान की गरिमा का सवाल है जिसके चलते वो अपनी चुप्पी तोड़ रहे हैं.

विज्ञापन में कहा गया है कि इन आरोपों से कांची मठ के समर्थक चिंतित हैं और लाखों की नींद हराम हो गई है.

मठ की संपत्ति पर शंकर मठ का कहना है कि मठ कई ट्रस्ट चला रहा है और ये कांची मठ के किसी हस्तक्षेप के बिना चल रहे हैं और उनकी संपत्ति पर उसका कोई नियंत्रण नहीं है.

विज्ञापन में कहा गया है कि कांची मठ के अलावा कुछ ट्रस्ट हैं जो कामकोटी पीठ के हैं. कहा गया है कि संस्था चंदों से चल रही है और उसका पूरा हिसाब मौजूद है.

आरोपों के जवाब

एक लेखिका अनुराधा रमणन द्वारा शंकराचार्य पर अश्लील व्यवहार के आरोप के जवाब में विज्ञापन में सवाल किया गया है कि वे बारह साल चुप क्यों बैठी रहीं?

दिलचस्प बात यह है कि विज्ञापन के अनुसार अनुराधा रमणन ने पिछले साल पहली अगस्त को कांची कामकोटी ट्रस्ट अस्पताल के एक कार्यक्रम में भाग लिया था.

उन्होंने रमणन से सवाल किया है कि अगर उनकी शंकराचार्य के बारे में राय अच्छी नहीं थी तो उन्होंने उस कार्यक्रम की अध्यक्षता क्यों की?

अभियोग पक्ष द्वारा शंकराचार्य के ऊषा नाम की एक महिला से संबंध के बारे में विज्ञापन कहता है कि वो कैंसर की मरीज़ हैं. उन्होंने अपने इलाज से जुड़े सारे दस्तावेज़ पुलिस को सौंप दिए हैं.

बैंक खातों की जानकारी

मठ के बैंक खातों के बारे में अभियोग पक्ष द्वारा लगाए गए आरोपों के बारे में विज्ञापन कहता है कि वो सत्य से परे हैं.

अप्रैल 2004 से सितम्बर 2004 तक बैंक खातों की जानकारी दी गई है और यह कहा गया है कि इस दौरान किसी भी ट्रस्ट के खातों से नकद पैसा नहीं निकाला गया.

इसी तरह इस विज्ञापन में एक मंदिर के लिए आयात किए गए सोने की पूरी सूचना, मठ द्वारा शिक्षा, सामाजिक सेवा और स्वास्थ्य संबंधी कार्यों पर ब्यौरा दिया गया है.

यही नहीं कांची मठ के इस विज्ञापन ने सरकारी वकीलों के उस बयान को भी चुनौती दी है कि शंकर रमन मठ का एक पूर्व कर्मचारी था. शंकर रमन की ही हत्या के मामले में शंकराचार्य को गिरफ्तार किया गया था.

मठ का कहना है कि शंकर रमन कांची मठ का कर्मचारी कभी नहीं रहा. बल्कि वो एक मंदिर का कर्मचारी था और कई सालों से वो शंकराचार्य पर आरोप लगा रहा था.

इन पत्रों की प्रति वह मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और कई जाने-माने लोगों को भेजता था और एक पत्र में तो शंकर रमन ने यह भी कहा कि पत्र लिखने, फोटोस्टेट और डाक पर आने वाला खर्च "कोई भला आदमी" उठाता था.

कुछ अन्य आरोपों के भी इस विज्ञापन में जवाब दिए गए हैं.

ये बताया गया है कि अखबारों में दिए इन विज्ञापनों का खर्च कांची मठ के समर्थक उठा रहे हैं.

आखिर में मठ के समर्थकों और शिष्यों से प्रार्थना की है कि वे शंकराचार्य और मठ के समर्थन में चिट्ठियाँ लिखें और चेक द्वारा चंदा दें.

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