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शंकराचार्य की गिरफ़्तारी पर हंगामा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
लोकसभा में शीतकालीन सत्र के दूसरे दिन विपक्ष ने शंकराचार्य की गिरफ़्तारी के विरोध में ज़ोरदार हंगामा किया. भारतीय जनता पार्टी के नेता विजय कुमार मलहोत्रा ने शून्य काल में यह मामला उठाते हुए आरोप लगाया कि इस मामले में केंद्र की यूपीए सरकार भी शामिल है. उनके इस आरोप पर सत्ता पक्ष के सदस्य भी नाराज़गी में खड़े हो कर उनका विरोध करने लगे. भाजपा नेता मलहोत्रा ने आरोप लगाया कि शंकराचार्य के साथ अच्छा व्यवहार नहीं किया जा रहा है और राज्य की पुलिस गवाहों को प्रताड़ित करके गवाही देने पर मजबूर कर रही है. शोरशराबे के बीच विपक्ष के आरोपों का जवाब देते हुए सदन के नेता प्रणव मुखर्जी ने कहा कि इस मामले से केंद्र सरकार का कोई लेना देना नहीं है और यह पूरा मामला राज्य सरकार का है. मार्क्सवादी कम्युनिस्ट पार्टी के सदस्य मोहम्मद सलीम ने कहा की वे समझते हैं कि शंकराचार्य का मामला भावनाओं और विश्वास का सवाल है लेकिन इस मामले का राजनीतिकरण नहीं करना चाहिए. वाकआउट कार्यवाही की शुरुआत में ही पेट्रोल, डीज़ल और रसोई गैस की क़ीमतों में वृद्धि का विरोध करते हुए मुख्य विपक्षी दल भाजपा ने सदन की कार्यवाही का बहिष्कार करते हुए वाकआउट किया. सत्र के पहले दिन भी भाजपा ने इस मामले पर हंगामा किया था. विपक्ष की मांग थी कि पेट्रोलियम पदार्थों में की गई बढ़ोत्तरी वापस ली जाए. उनकी मांग को अस्वीकार करते हुए पेट्रोलियम मंत्री मणिशंकर अय्यर ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पेट्रोलियम की क़ीमतें बढ़ गई हैं इसलिए सरकार को मजबूरी में क़ीमतें बढ़ानी पढ़ी हैं. उन्होंने टैक्स का मामला उठाते हुए कहा कि केंद्र सरकार ने तो पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स कम कर दिया है लेकिन राज्यों में अब भी इस पर असमान और अधिक टैक्स लगाया जा रहा है. उन्होंने कहा कि राज्यों को भी पेट्रोलियम पदार्थों पर टैक्स कम करना चाहिए. |
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