|
मनमोहन सिंह की उद्योग जगत से अपील | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने उद्योग जगत से अपील की है कि वे देश के आधारभूत विकास में अपना योगदान बढ़ाएँ. प्रधानमंत्री ने कहा कि देश के आधारभूत विकास के क्षेत्र में बड़े निवेश की आवश्यकता है और ऐसा सरकारी और निजी क्षेत्र की साझेदारी के आधार पर होना चाहिए. मनमोहन सिंह ने उद्योग जगत को सामाजिक क्षेत्र में सरकार के साथ हाथ मिलाकर काम करने का न्यौता दिया ताकि समाज के कमज़ोर तबके की रक्षा की जा सके. प्रधानमंत्री शनिवार को देश के शीर्ष उद्योगपतियों से मिले और उन्हें बताया कि उनकी सरकार भारतीय अर्थव्यवस्था के आधुनिकीकरण और लोगों के कल्याण के लिए प्रतिबद्ध है. इस बैठक में रियालंस ग्रुप के चेयरमैन मुकेश अंबानी, टाटा के चेयरमैन रतन टाटा, विप्रो के चेयरमैन अज़ीम प्रेमजी और इन्फ़ोसिस के नारायण मूर्ति भी मौजूद थे. इनके अलावा वित्त मंत्री पी चिदंबरम और वाणिज्य मंत्री कमलनाथ भी इस बैठक में शामिल हुए. चुनौती प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि उनकी सरकार ने जनता को किए गए वादे भी पूरे करना शुरू कर दिया है. हालाँकि उन्होंने माना कि उनकी सरकार के सामने कई चुनौतियाँ भी हैं. लेकिन पहली चुनौती ग्रामीण अर्थव्यस्था ख़ासकर कृषि क्षेत्र में निवेश बढ़ाना है. प्रधानमंत्री ने कहा कि आधारभूत क्षेत्र में विकास भी प्राथमिकता है और इसके लिए सरकार और उद्योग जगत को मिल कर काम करना होगा. उन्होंने कहा कि मानव विकास और रोज़गार के क्षेत्र में भी निवेश की आवश्यकता है. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कहा कि इन सबके लिए समाज के कमज़ोर तबके के हितों की रक्षा करना भी ज़रूरी है. उन्होंने कहा कि इसके लिए उद्योग जगत को सरकार के साथ हाथ मिलाकर काम करना होगा. प्रधानमंत्री ने कहा कि मुद्रा स्फ़ीति को लेकर वे थोड़ा चिंतित भी हैं. उन्होंने हाल में मुद्रा स्फ़ीति की दर में बढ़ोत्तरी के पीछे अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में तेल की बढ़ती क़ीमतों को ज़िम्मेदार ठहराया. प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार बाज़ार के ऐसे दबाव से आम आदमी को बचाना चाहती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||