|
भारत में केंद्रीय मंत्रिमंडल का विस्तार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में आज केंद्रीय मंत्रिमंडल में आंशिक विस्तार और फेरबदल हो रहा है. राष्ट्रपति भवन की ओर से जारी विज्ञप्ति के अनुसार शनिवार दोपहर बाद तीन बजे शपथ ग्रहण समारोह होगा. झारखंड मुक्ति मोर्चा (जेएमएम) के अध्यक्ष शिबू सोरेन की केंद्रीय मंत्रिमंडल में वापसी तय माना जा रहा है. क़रीब 30 साल पुराने एक हत्याकांड के मामले में ग़िरफ़्तारी का वारंट जारी होने के कारण सोरेन ने मंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था. अभी सोरेन ज़मानत पर हैं. इसके अलावा पिछले कई महीनों से बिना विभाग के मंत्री तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव को श्रम और रोज़गार मंत्रालय दिए जाने की उम्मीद जताई जा रही है. परिस्थिति मनमोहन सिंह सरकार के गठन के बाद चंद्रशेखर राव को जहाज़रानी मंत्रालय सौंपा गया था लेकिन डीएमके की मंत्रालय को लेकर नाराज़गी के कारण चंद्रशेखर राव ने अपना मंत्रालय छोड़ दिया था.
तभी से वे बिना विभाग के मंत्री बने हुए थे. अब उन्हें श्रम और रोज़गार मंत्रालय देने की बात चल रही है. इस समय यह मंत्रालय शीशराम ओला के पास है. उम्मीद जताई जा रही है कि शीशराम ओला खनन मंत्रालय संभालेंगे. शुक्रवार को शिबू सोरेन और चंद्रशेखर राव ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह से अलग-अलग मुलाक़ातें कीं. सोरेन के मंत्रिमंडल में लौटने में झारखंड में आगामी विधानसभा चुनावों के मद्देनज़र काफ़ी महत्वपूर्ण माना जा रहा है. इस साल जुलाई में शिबू सोरेन का मामला उस समय गरमा गया था, जब उनके ख़िलाफ़ झारखंड की एक अदालत ने ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया. उन्हें ग़िरफ़्तार करने दिल्ली पहुँची झारखंड पुलिस टीम को सोरेन नहीं मिले. इस मामले पर भारतीय जनता पार्टी की अगुआई में विपक्ष ने जम कर हंगामा किया. कई दिन चले हंगामे के बाद सोरेन ने इस्तीफ़ा दे दिया और फिर अदालत के सामने पेश हुए. जहाँ से उन्हें न्यायिक हिरासत में भेजा गया और बाद में उनकी ज़मानत भी हो गई. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||