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भोपाल त्रासदी की बरसी पर शोकसभाएँ | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भोपाल में घटी पिछली शताब्दी की सबसे भयानक औद्योगिक त्रासदी को बीस साल पूरे हो गए हैं. भोपाल में उस दिन और उसके बाद गैस लीक से मारे जाने वाले लोगों को याद किया जा रहा है और जो उससे प्रभावित हुए उनकी व्यथा पर ध्यान केंद्रित करने के प्रयास हो रहे हैं. मध्यरात्रि के कुछ ही क्षण बाद अमरीकी कंपनी यूनियन कार्बाइड के कारखाने से हुई गैस लीक के शिकार हुए कुछ लोगों और मृतकों के रिश्तेदारों ने कारखाने के गेट के सामने प्रदर्शन किया और शोकसभा भी हुई. बीस साल पहले इसी दिन चालीस टन ज़हरीली गैस कारखाने से लीक हो गई थी. बीबीसी संवाददाता निक ब्रायंट के अनुसार मशालें, मोमबत्तियाँ और रिश्तेदारों की तस्वीरें लिए लगभग सौ लोग कारखाने के गेट के सामने एकत्र हुए. ग़ुस्सा लोगों में ग़ुस्सा था क्योंकि बहुत सारे लोग अब भी गैस लीक के परिणाम भुगत रहे हैं.
माना जाता है कि इस त्रासदी के कारण मारे जाने वालों की संख्या 18 हज़ार है जबकि हज़ारों अन्य लोग अब भी कई बीमारियों के शिकार हैं. कारखाने में अब भी अनुमानित 25 हज़ार टन ज़हरीले पदार्थ हैं. मध्यप्रदेश की सरकार का कहना है कि उसने उस जगह का सर्वेक्षण करने के आदेश दिए हैं. गैस लीक के शिकार हुए लोगों के पक्ष में लड़ाई लड़ रहे स्वयंसेवी संगठन और कार्यकर्ता कहते हैं कि अमरीकी कंपनी प्रभावित लोगों और रिश्तेदारों को मुआवज़ा देने की अपनी ज़िम्मेदारी नहीं निभाई. इस कंपनी को डाउ केमिकल्स नामक कंपनी ने ख़रीद लिया है और उसका कहना है कि जब त्रासदी हुई तो कंपनी ने अपनी नैतिक ज़िम्मेदारी स्वीकार की थी. लेकन वह अब भी यही कहती है कि ये त्रासदी तोड-फोड़ के मक़सद से की गई किसी कार्रवाई के कारण हुई. |
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