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मूंगफली बेचने वाला मालामाल | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारतीय राज्य हिमालच प्रदेश के शहर बिलासपुर के राजपरिवार में एक अनोखा विवाद पैदा हो गया है. राजकुमारी राजराजेश्वरी का निधन होने के बाद जब उनकी वसीयत पढ़ी गई तो पता चला कि वह अपनी लगभग ढाई करोड़ रुपये की सम्पत्ति एक मूंगफली बेचने वाले व्यक्ति के नाम कर गई हैं. यह व्यक्ति और उसका बेटा 66 वर्षीय राजकुमारी के यहाँ घरेलू नौकर का काम भी करते थे. राजकुमारी के भाई का कहना है कि उनकी बहन को नशीली दवा खिला कर उनसे इस नई वसीयत पर दस्तख़त करा लिए गए हैं और वह इस मामले को अदालत में ले जाएँगे. बिलासपुर के ज़िलाधिकारी शुभाशीष पांडा ने बीबीसी से कहा, "राजराजेश्वरी की वसीयत के मुताबिक नक़द राशि, जवाहरात, कार, फ़ारसी क़ालीन और अन्य बहुमूल्य कलाकृतियाँ बबलू गुप्ता और राम बिलास को दी जानी हैं". "इसके बाद बची सम्पत्ति हिमाचल प्रदेश सरकार को वृद्ध लोगों का आश्रय बनाने के लिए सौंप दी गई है". ज़िलाधीश का कहना है कि इस वसीयत पर राजकुमारी ने अपने जन्मदिन के मौक़े पर एक मजिस्ट्रेट धनवीर ठाकुर की मौजूदगी में हस्ताक्षर किए हैं. उसी रात राजकुमारी ने सीने में दर्द की शिकायत की और उन्हें शिमला से 150 किलोमीटर दूर सुंदरनगर के अस्पताल में दाख़िल करा दिया गया जहाँ दो दिन बाद उनका निधन हो गया. राजकुमारी के भाई कीर्ति चंद और भाभी करुणा का कहना है कि नौकरों ने उन्हें नशीली दवाई दे कर सम्पत्ति अपने नाम करा ली. करुणा कहती हैं, "शोकसमारोह आज ही ख़त्म हुए हैं और अब हम इस मामले को अदालत में ले जाकर अपने पूर्वजों की सम्पत्ति पर अपना दावा पेश करेंगे". लेकिन नौकरों का कहना है कि उन पर ग़लत आरोप लगाए जा रहे हैं. वे कहते हैं, "हम ऐसा कुछ क्यों करेंगे जबकि वह हमारे साथ इतना अच्छा बर्ताव करती थीं". शुभाशीष पांडा का कहना है कि शुरुआती जाँच में तो मौत का कारण दिल का दौरा पता चला है लेकिन अगले कुछ दिनों में फ़ॉरेन्सिक रिपोर्ट आ जाने के बाद मामला और स्पष्ट हो जाएगा. |
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