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बुधवार, 14 जुलाई, 2004 को 18:02 GMT तक के समाचार
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बिड़ला परिवार में वसीयत का संकट
राजेंद्र लोढ़ा
राजेंद्र लोढ़ा लगभग दो दशक से बिड़ला परिवार के काफ़ी निकट रहे थे
भारत के सबसे अमीर औद्योगिक घरानों में से एक बिड़ला घराने के सामने एक अजीब सी स्थिति पैदा हो गई है.

ये संकट खड़ा हुआ है एम पी बिड़ला समूह की मालकिन प्रियंवदा बिड़ला के वसीयत को लेकर.

इस वसीयत में प्रियंवदा बिड़ला ने 50 अरब रूपए की संपत्ति अपने एकाउंटेंट राजेंद्र लोढ़ा के नाम कर दी है.

अब बिड़ला परिवार के सदस्यों ने 'बिल्कुल बाहरी व्यक्ति' के नाम संपत्ति करनेवाली इस वसीयत को अदालत में चुनौती दे दी है.

राजेंद्र लोढ़ा ने इस बारे में अभी कुछ नहीं कहा है.

वसीयत

प्रियंवदा बिड़ला
प्रियंवदा बिड़ला ने पति के निधन के बाद कारोबार संभाला

प्रियंवदा बिड़ला के पति माधव प्रसाद बिड़ला का 1990 में निधन हो गया था और उनकी कोई संतान नहीं थी.

अपने पति के बाद एम पी बिड़ला समूह का कारोबार संभालनेवाली प्रियंवदा बिड़ला का पिछले सप्ताह 76 वर्ष की आयु में निधन हो गया था.

उनके निधन के बाद इस सप्ताह सोमवार को नामी चार्टर्ड एकाउंटेंट राजेंद्र लोढ़ा ने कोलकाता में बिड़ला परिवार के स्थायी निवास पर वसीयत पढ़कर सुनाई.

वसीयत में राजेंद्र लोढ़ा को एम पी बिड़ला उद्योग समूह का इकलौता वारिस घोषित किया गया.

बिड़ला परिवार की सात शाखाओं की पूरी संपत्ति 50 अरब रूपए से भी अधिक बैठती है.

इस घटना से स्तब्ध बिड़ला परिवार ने वसीयत को अदालत में चुनौती देने का फ़ैसला किया है.

चुनौती

परिवार के सबसे बुज़ुर्ग सदस्य बसंत कुमार बिड़ला ने कहा है कि परिवार के सभी सदस्य वसीयत को चुनौती देने के बारे में एकमत हैं.

बसंत कुमार बिड़ला ने कहा,"हमारे परिवार के सदस्यों ने वसीयत की जाँच की है और उनमें इस बात पर सहमति है कि इसकी सत्यता को चुनौती देना हमारा नैतिक और क़ानूनी अधिकार है".

बिड़ला परिवार ने क़ानूनी कार्रवाई के लिए कोलकाता की दो सॉलिसिटर समूहों, खेतान एंड को और एन जी खेतान एंड को की सेवाएँ लेना तय किया है.

जवाबी वार

बाज़ार पर नज़र रखनेवाले विश्लेषकों के अनुसार राजेंद्र लोढ़ा को कच्चा समझना ग़लत होगा.

विश्लेषक तामल मजुमदार का कहना है,"लोढ़ा तेज़ व्यक्ति हैं और उन्होंने बिड़ला परिवार के लिए अदालत में कई मुक़दमे जीते हैं".

तामल मजुमदार के अनुसार राजेंद्र लोढ़ा बिड़ला समूह को भली-भांति पहचानते हैं.

राजेंद्र लोढ़ा लगभग दो दशक से बिड़ला परिवार के काफ़ी निकट रहे थे.

पाँच वर्ष पहले उन्हें एम पी बिड़ला समूह का सह अध्यक्ष बनाया गया था.

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