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सिख तीर्थयात्री पाकिस्तान पहुँचे | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सिखों के पहले गुरू नानकदेव जी के पाँच सौ पैंतीसवें जन्मदिन के अवसर पर पाकिस्तान में हज़ारों सिख तीर्थयात्री जुटे हैं. गुरू नानक जयंती के मौक़े पर इस कार्यक्रम का आयोजन करने वालों का कहना है कि दुनिया भर से लगभग 17 हज़ार तीर्थयात्री गुरूनानक के जन्म स्थान ननकाना साहिब पहुँच रहे हैं. आयोजकों का कहना है कि इन 17 हज़ार तीर्थयात्रियों से भारत से लगभग पाँच हज़ार लोग विशेष रेलगाड़ियों के ज़रिए पाकिस्तान पहुँच रहे हैं. दस दिन तक चलने वाले इस आयोजन से जुड़े लोगों का कहना है कि दोनों देशों के रिश्तों में आई बेहतरी से तीर्थयात्रियों की संख्या में इस वर्ष बढ़ोत्तरी हुई है. लाहौर से बीबीसी संवाददाता शाहिद मलिक ने बताया कि तीर्थयात्रियों का पहला जत्था अटारी से 'सिख पिलग्रिम स्पेशल' ट्रेन में बैठकर लाहौर पहुँचा, सभी तीर्थयात्री बेहद खुश थे. कई तीर्थयात्रियों ने कहा कि उनका अच्छा खयाल रहा जा रहा है और कुछ लोगों ने बीबीसी संवाददाता से यहाँ तक कहा कि उन्हें ऐसा लग रहा है मानो वे अपने देश में आ गए हैं. सफ़र बहुत लंबा नहीं था लेकिन क़ानूनी कार्रवाइयों और काग़ज़ात की पड़ताल की लंबी प्रक्रिया के कारण इस यात्रा में लोगों को काफ़ी समय लगा, पहली ट्रेन लगभग पाँच घंटे की देरी से लाहौर पहुँची. कार्यक्रम बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कनाडा, अमरीका और ब्रिटेन जैसे देशों से भी आए हैं, इनमें से ज़्यादातर लोग सीधे विमानों से सीधे पाकिस्तान पहुँचे हैं.
ये तीर्थयात्रा गुरूद्वारा जन्मस्थान यानी ननकाना साहिब के अलावा पाकिस्तानी पंजाब के दूसरे सिख तीर्थों की भी यात्रा करेंगे जिनमें पंजा साहिब प्रमुख है. तीर्थयात्री ननकाना साहिब में चार दिन बिताएँगे जहाँ भजन-कीर्तन के अलावा आतिशबाज़ी का कार्यक्रम भी होंगे, इसके अलावा गुरू ग्रंथ साहिब की एक शोभायात्रा भी निकाली जाएगी. पाकिस्तान सरकार ने तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए कड़े इंतज़ाम किए हैं और लगभग 12 हज़ार पुलिसकर्मियों की ड्यूटी पर लगाया गया है जो पिछली बार की तुलना में दोगुनी संख्या है. एक सिख तीर्थयात्री ने कहा कि अगर दोनों देशों के बीच शांति हो और कश्मीर समस्या का हल हो जाए तो लाखों लोग इस पर्व को मनाने के लिए पाकिस्तान पहुँचेंगे. |
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