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गुरुवार, 11 नवंबर, 2004 को 11:35 GMT तक के समाचार
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भारत समेत दक्षिण एशिया में शोक
अराफ़ात और इंदिरा गाँधी
भारत पीएलओ को मान्यता देने वाला पहला ग़ैर-अरब देश था
फ़लस्तीनियों के संघर्ष का प्रतीक बन गए पीएलओ नेता यासिर अराफ़ात के निधन पर दक्षिण एशिया के कई देशों से शोक संदेश आ रहे हैं.

दक्षिण एशिया के देश लंबे समय से फ़लस्तीनियों के संघर्ष के समर्थक रहे हैं.

भारत के राष्ट्रपति अब्दुल कलाम ने भारतीय जनता की ओर से भेजे शोक संदेश में कहा है, "फ़लस्तीनियों ने एक दार्शनिक नेता खो दिया है जिसका पूरा जीवन फ़लस्तीनी राष्ट्र को समर्पित था."

भारत पहला ऐसा ग़ैर-अरब देश था जिसने पीएलओ को फ़लस्तीनी लोगों के एकमात्र प्रतिनिधि के तौर पर मान्यता दी थी.

भारत के आधिकारिक बयान में कहा गया है - "भारतीय जनता और नेता यासिर अराफ़ात का बहुत आदर करते रहे हैं और उनके प्रशंसक थे. अराफ़ात को सदा भारत के सच्चे मित्र के रूप में याद किया जाएगा."

भारत
 भारतीय जनता और नेता यासिर अराफ़ात का बहुत आदर करते रहे हैं और उनके प्रशंसक थे. अराफ़ात को सदा भारत के सच्चे मित्र के रूप में याद किया जाएगा
आधिकारिक बयान

भारत के प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने शोक संदेश में कहा, "राष्ट्रपति अराफ़ात को हम हमेशा एक दोस्त और सच्चे देशभक्त के रूप में याद करेंगे."

भारत में लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चैटर्जी ने शोक व्यक्त करते हुए कहा कि ये फ़लस्तीनी लोगों और उनके संघर्ष के लिए बहुत बड़ा धक्का है.

पाकिस्तान ने तीन दिन के शोक की घोषणा की है और राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ ने यासिर अराफ़ात के निधन पर दुख व्यक्त किया है.

फ़लस्तीनी प्रधानमंत्री अहमद कुर्रई को लिखे एक पत्र में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ ने लिखा, "यासिर अराफ़ात फ़लस्तीनी संघर्ष के सबसे बड़े प्रतीक थे."

अफ़ग़ानिस्तान के राष्ट्रपति हामिद करज़ई ने कहा है कि उनकी कमी हमेशा खलेती.

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