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'सरकार सभी गुटों से बातचीत को राज़ी' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कांग्रेस पार्टी की अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कश्मीर में करगिल में एक जनसभा में कहा है कि संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन (यूपीए) सरकार कश्मीर में शांति लाने के लिए किसी भी गुट से बातचीत के लिए तैयार है. पाँच वर्ष पूर्व करगिल में पाकिस्तान के साथ हुए संघर्ष के बाद सोनिया गाँधी की यह कश्मीर की पहली यात्रा थी और केंद्र में यूपीए की सरकार बनने के बाद कश्मीर पहुँचने वाली वे पहली शीर्ष स्तरीय नेता हैं. इससे पहले प्रधानमंत्री और गृह मंत्री ने कश्मीर की अपनी यात्रा स्थगित कर दी थी. सोनिया गाँधी ने कहा, "यूपीए सरकार कश्मीर समस्या के समाधान के लिए हरसंभव क़दम उठाएगी और बातचीत के ज़रिए मसले को हल करने की कोशिश करेगी." एनडीए सरकार के सत्ता से हटने के बाद से कश्मीर के अलगाववादी संगठन हुर्रियत कॉन्फ्रेंस से हो रही बातचीत भी रूकी पड़ी है. सोनिया गाँधी ने अलगाववादी हिंसा से जूझ रहे राज्य में विकास की लहर लाने का वादा भी किया, उन्होंने कहा कि पाकिस्तान के साथ टकराव से कश्मीर का बहुत नुक़सान हुआ है. सोनिया गाँधी ने कहा कि करगिल में एक असैनिक हवाई अड्डा बनाने के रास्ते में आने वाली रूकावटों को दूर करने का भी प्रयास करेंगी, हवाई अड्डा बनाने की माँग इस क्षेत्र में काफ़ी समय से रही है. कांग्रेस अध्यक्ष ने करगिल संघर्ष के दौरान वहाँ के लोगों की भूमिका की सराहना की और कहा कि वे "बिना वर्दी वाले भारतीय सैनिक हैं." सोनिया गाँधी ने ज़ोर देकर कहा कि लड़ाई से कुछ भी हासिल नहीं होगा जिसका स्थानीय लोगों ने तालियाँ बजाकर स्वागत किया, लड़ाई से सबसे ज़्यादा नुक़सान यहाँ के लोगों को ही हुआ है. भारत और पाकिस्तान के बीच जारी युद्धविराम से इस क्षेत्र में इस वर्ष बहुत शांति रही है जिससे लोगों के जीवन बेहतर हुआ है और वे चाहते हैं कि शांति बनी रहे. |
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