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हुर्रियत को समय देना चाहिए: मुफ़्ती | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद का कहना है कि केंद्र की नई सरकार को अलगाववादी संगठन हुर्रियत कांफ्रेंस को कुछ समय देना चाहिए. 'आपकी बात बीबीसी के साथ' कार्यक्रम में उन्होंने कहा कि उनका मानना है कि आख़िरकार हुर्रियत के सभी गुट बातचीत के लिए सामने आएँगे. श्रोताओं के सवाल के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि उनके पौने दो साल के शासन काल में कश्मीर में माहौल बदला है और लोगों को आकर इसे देखना चाहिए. मुख्यमंत्री सईद ने इस बात से इंकार किया कि नई सरकार के आने से अलगाववादी गुटों से बातचीत पटरी से उतर गई है. उन्होंने कहा कि नई सरकार आई है और वो हालात को जान समझकर काम करेगी. जम्मू कश्मीर के मुख्यमंत्री ने कहा, "सरकारों में निरंतरता होती है और केंद्र की नई सरकार भी उसी दिशा में आगे बढ़ेगी जिस दिशा में पुरानी सरकार चल रही थी." फ़ार्मूला नहीं भारत पाकिस्तान के बीच समझौते के लिए फ़ार्मूले के सवाल पर उन्होंने कहा, "मसले को हल करने से पहले फ़ार्मूला नहीं बनाना चाहिए, बातचीत से कोई फ़ार्मूला निकलेगा."
उन्होंने कहा कि दोनों देशों की अपनी नीतियाँ हैं और हल तो बातचीत से ही निकलेगा. उनका कहना था कि 56 साल पुरानी समस्या के बारे में यह उम्मीद नहीं करना चाहिए कि हल एक दो महीनों में निकल जाएगा. राज्य में कांग्रेस से गठबंधन के बारे में उन्होंने कहा कि मतभेद की छोटी मोटी घटनाएँ होती रहती हैं, लेकिन सब ठीक चल रहा है. मुख्यमंत्री पद को लेकर कांग्रेस के साथ समझौते के मामले में उन्होंने कहा कि जनता जब चाहेगी वे पद से उतर जाएंगे. उन्होंने अपने मरहम लगाने की नीति का बचाव करते हुए कहा कि इससे कश्मीर में बहुत कुछ बदला है. मुख्यमंत्री ने कहा कि चुनावी वादे के मुताबिक़ हर परिवार के एक सदस्य को रोज़गार देना संवैधानिक रुप से संभव नहीं है. |
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