|
'अन्य राज्यों की ही तरह है कश्मीर' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत में यूरोपीय संघ के दूत फ्रांसिस्को डे कमारा गोम्स ने कहा है कि कश्मीर भारत का अटूट अंग है, ठीक उसी तरह जैसे देश का कोई अन्य राज्य. श्रीनगर में चल रही भारत-यूरोपीय संघ की चार दिवसीय बैठक के दूसरे दिन यूरोपीय संघ के प्रवक्ता ने यह बात कही है. उन्होंने यह बात तब कही जब पत्रकारों ने पूछा कि भारत-यूरोपीय संघ की बैठक कश्मीर में कराने का मक़सद क्या कश्मीर को भारतीय हिस्सा साबित करना नहीं था. कमारा गोम्स ने कहा कि उनका यूरोपीय संघ के दूत के रूप में कश्मीर आना ही इस बात का सबूत है कि वह दूसरे राज्यों की तरह ही भारत का हिस्सा है. उन्होंने कहा कि यूरोपीय संघ कश्मीरी नेताओं और पाकिस्तान के साथ बातचीत करने के भारत के रुख़ का समर्थन करता है ताकि राज्य में शांति स्थापित हो सके. कमारा गोम्स ने दोहराया कि यूरोपीय संघ कश्मीर मामले में हस्तक्षेप नहीं करने की नीति पर क़ायम है. उन्होंने भारत के रवैए की सराहना करते हुए कहा कि वह कश्मीरी नेताओं और पड़ोसी देश से बातचीत करके इस क्षेत्र में शांति लाने का प्रयास कर रहा है. यूरोपीय दूत ने कहा, "हम इन कोशिशों का समर्थन करते हैं लेकिन हमें इस मामले में कोई हस्तक्षेप नहीं करना है." विवाद कश्मीरी मेहमाननवाज़ी के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, "मुझे बताया गया था कि कश्मीरी लोग मेहमाननवाज़ होते हैं और तमीज़ से पेश आने वाले लोगों की अच्छी ख़ातिर करते हैं, लेकिन मुझे अचानक एहसास हुआ कि यहाँ मेरा स्वागत नहीं हो रहा, मुझे थोड़ा अचरज भी हुआ." उनके इस बयान पर स्थानीय पत्रकारों ने विरोध प्रकट किया, पत्रकारों ने संवाददाता सम्मेलन के बाद होने वाले चायपान का भी बहिष्कार कर दिया. भारत-यूरोपीय संघ की इस बैठक को राउंडटेबल बैठक कहा जा रहा है, गुरूवार को शुरू हुई यह बैठक रविवार को समाप्त होगी. इस बैठक में टिकाऊ विकास और पर्यटन पर ज़ोर दिया जा रहा है. यूरोप के कई देशों ने अपने नागरिकों को सलाह दे रखी है कि वे कश्मीर जाने से परहेज़ करें, आशा की जा रही है यह सलाह आधिकारिक तौर पर हटाई जा सकती है. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||