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फीका है जम्मू-कश्मीर में चुनाव प्रचार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
कश्मीर में चुनाव प्रचार बाक़ी देश के मुक़ाबले काफ़ी सहमा-सहमा सा दिख रहा है, बुलेट और बैलेट के बीच की तनातनी साफ़ नज़र आती है. ज़्यादातर पार्टियों के चुनाव प्रचार वाहनों पर कई हमले हो चुके हैं और भोंपू वाली एक जीप के साथ अर्धसैनिक बलों की पाँच गाड़ियाँ चल रही हैं. शुक्रवार को श्रीनगर शहर में पूरा दिन गुज़ारने के बाद मुझे सिर्फ़ एक जीप दिखाई दी जिसके ज़रिए नेशनल कॉन्फ्रेंस के उम्मीदवार उमर अब्दुल्ला का प्रचार हो रहा था. श्रीनगर शहर में पोस्टर और बैनर तो दिख रहे हैं लेकिन उतने नहीं जितने भारत के किसी और शहर में. महबूबा और उनके पिता मुफ़्ती मुहम्मद सईद, फ़ारूक़ और उमर अब्दुल्ला दिन में तीन-चार रैलियाँ कर रहे हैं जिनमें लोग जुट रहे हैं. लेकिन दूसरी तरफ़ चरमपंथी संगठनों और हुर्रियत कॉन्फ्रेंस के गिलानी गुट ने चुनावों के बहिष्कार का ऐलान किया है जिसकी वजह से तनाव और दहशत की छाया भी दिख रही है. शुक्रवार को जुमे की नमाज़ के बाद मीर वायज़ उमर फारूक़ को सुनने के लिए चुनाव लड़ रहे किसी नेता की सभा से अधिक लोग जुटे थे, मीर वायज़ इस चुनाव का बहिष्कार करने का आह्वान कर रहे हैं. कड़ी सुरक्षा श्रीनगर पूरी तरह से छावनी में तब्दील हो गया दिखता है, मुझे अपने होटल में दाख़िल होने के लिए कई बार तीन चेक नाकों से गुज़रना पड़ रहा है, सामान और गाड़ी की तलाशी, कभी भी, कहीं भी हो जाती है.
पूरे शहर में केंद्रीय रिज़र्व पुलिस और सीमा सुरक्षा बल के जवान नज़र आते हैं जिनके हाथों में प्लास्टिक की नई एके-47 राइफ़लें और उनकी मैगज़ीन में कितनी गोलियाँ हैं यह भी दिखाई देता है. जवानों के चेहरे पर उस तरह का भाव नहीं है जैसा दिल्ली में तैनात अर्धसैनिक बलों के लोगों के चेहरे पर होता है, वे हर चलती हुई गाड़ी के अंदर बैठे व्यक्ति को अच्छी तरह देखते हैं. अनंतनाग से सीपीआईएम के उम्मीदवार यूसुफ़ तारीगामी के घर पहुँचने पर सेना के लगभग 25 जवान दिखाई दिए, लोहे के तीन बड़े फाटकों से गुज़रने के बाद ही हमारी उनसे मुलाक़ात हो सकी. उन्होंने मुझे बताया कि उन्होंने सुरक्षा इंतज़ाम को कम से कम कराने की कोशिश की है ताकि लोग उनसे मिल सकें, उनके काफ़िले के साथ दो बख्तरबंद गाड़ियाँ और लगभग 20 सैनिक सफ़र करते हैं. तारीगामी कहते हैं कि “सुरक्षा देखनी हो तो महबूबा मुफ़्ती की सुरक्षा देखिए जिनके साथ 10-10 गाड़ियाँ चलती हैं.” चुनावी रैलियों में तो सुरक्षा के इंतज़ाम और भी कड़े हैं, देश के दूसरे हिस्सों की तरह नेता यहाँ जनता से दूर ही रहते हैं, सुरक्षा घेरे में मंच पर आते हैं और भाषण देकर चले जाते हैं. श्रीनगर के राजबाग़ इलाक़े में उमर अब्दुला के बैनर-पोस्टर लगाने वाले लोगों के साथ सुरक्षाकर्मियों का पूरा दस्ता मौजूद था, बैनर लगा रहे शाबाद मीर ने बताया कि यह काम सिर्फ़ दिन में सुरक्षा बलों की निगरानी में होता है. अनंतनाग से उम्मीदवार तारीगामी मानते हैं कि दहशत का माहौल है लेकिन उनका कहना है कि स्थिति इस बार पिछले चुनाव से बेहतर है. बारामूला में 20 अप्रैल को मतदान के दिन हुई हिंसा को देखते हुए लगता है कि सुरक्षा बलों के बाक़ी बची चार सीटों पर शांतिपूर्ण मतदान कराना सबसे बड़ी चुनौती होगी. चौबीस अप्रैल की शाम दूसरे दौर के लिए चुनाव प्रचार समाप्त हो जाएगा, दूसरे दौर में सिर्फ़ श्रीनगर-बड़गाम में मतदान होना है. |
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