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संयुक्त बयान की कड़ी आलोचना | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत के मुख्य विपक्षी दल भारतीय जनता पार्टी ने प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और पाकिस्तानी राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ की बातचीत के बाद आए संयुक्त बयान को 'निराशाजनक और चिंताजनक' बताया है. जहाँ भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने संयुक्त बयान का स्वागत किया है वहीं पाकिस्तानी कश्मीर पर दोनो नेताओं के बीच हुई बातचीत पर मिश्रित प्रतिक्रिया आई है. वरिष्ठ भाजपा नेता और पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा का कहना था कि भारत के हित के महत्वपूर्ण मुद्दों का बयान में कोई ज़िक्र नहीं है. उनका ये भी कहना था कि काफ़ी देर से भारत-पाकिस्तान संबंधों से जुड़े मुद्दों - विशेष तौर पर कश्मीर पर भारत की स्थिति को कमज़ोर किया गया है. यशवंत सिन्हा का कहना था कि भारतीय प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के साथ अपनी बातचीत को केवल कश्मीर पर ही केंद्रित होने दिया.
उनका कहना था कि संयुक्त बयान में कश्मीर मुद्दे का अलग से ज़िक्र किया गया है और ऐसा होने देने से भारत ने पाकिस्तान की कश्मीर को दोनो देशों की वार्ता में मुख्य मुद्दा बनाए जाने की माँग को स्वीकृति दे दी है. कश्मीरियों की प्रतिक्रिया उधर भारतीय राज्य जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री मुफ़्ती मोहम्मद सईद ने दोनो नेताओं की बातचीत को 'सकारात्मक और उत्साहवर्धक' बताया है. मुख्यमंत्री सईद का कहना था कि इस बातचीत से उपमहाद्वीप में स्थायी शांति स्थापित होने की आशा है और इससे जम्मू-कश्मीर की स्थिति भी बेहतर होगी.
दूसरी ओर पाकिस्तानी कश्मीर के प्रधानमंत्री सरदार सिकंदर हयात ख़ान ने इस बातचीत का स्वागत करते हुए कहा कि कश्मीर मुद्दे के हल के लिए सभी शांतिपूर्ण कदमों का स्वागत है. उन्होंने कहा कि भारत को कश्मीरियों में विश्वास पैदा करने के लिए भारतीय कश्मीर के सभी नगरों और शहरों से सेना हटा लेनी चाहिए, कश्मीरी क़ैदियों को जेल से रिहा करना चाहिए और नागरिक अधिकार बहाल करने चाहिए. लेकिन जमाते इस्लामी पार्टी के पाकिस्तानी कश्मीर में अध्यक्ष सरदार ऐजाज़ अफ़जल ने संयुक्त बयान की आलोचना की है और कहा है कि यह संयुक्त राष्ट्र के प्रस्तावों को नज़रअंदाज़ करता है. पाकिस्तानी कश्मीर में पूर्ण स्वतंत्रता की पक्षधर ऑल पार्टी नेशनल एलाएंस ने दोनो नेताओं की बातचीत का स्वागत किया है. उधर कश्मीर की पूर्ण स्वतंत्रता की एक और पक्षधर जम्मू-कश्मीर लिब्रेशन फ़्रंट के अध्यक्ष अमानुल्लाह ख़ान ने संयुक्त बयान पर निराशा जताई है और कहा है कि कश्मीरियों के आत्मनिर्णय के अधिकार का कोई ज़िक्र नहीं है. |
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