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'आतंकवाद के मुद्दे पर भी चर्चा हुई' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत ने कहा है कि भारत-पाक वार्ता तब ही आगे बढ़ सकती है यदि पाकिस्तान अपने उस आश्वासन पर अमल करे कि वह अपनी ज़मीन को 'आतंकवादी' गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा. भारत में विपक्ष की ओर से भारत-पाक साझा बयान की कड़ी आलोचना हुई है. समाचार माध्यमों के अनुसार पूर्व विदेश मंत्री यशवंत सिन्हा ने तो यहाँ तक कह दिया कि 'जनवरी में पाकिस्तान में जो कुछ हासिल किया था उसे इस सरकार ने खो दिया है.' लेकिन प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने ज़ोर देकर कहा है कि राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ के साथ बातचीत में 'भारत में सीमापार से घुसपैठ' का मुद्दा उठा था. समाचार माध्यमों के अनुसार उन्होंने कहा कि उन्होंने राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से स्पष्ट शब्दों में कहा कि भारत-पाक वार्ता का शुरुआती मुद्दा यही है कि वह 'पाकिस्तान की ज़मीन या फिर उसके नियंत्रण में जो ज़मीन है, उसे आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने देगा.' उन्होंने कहा, "राष्ट्रपति मुशर्रफ़ को स्पष्ट बताया गया कि छह जनवरी 2004 के पाकिस्तान के बयान पर अमल होना चाहिए जिसके तहत ये कहा गया था कि पाकिस्तान की ज़मीन का आतंकवादी गतिविधियों के लिए इस्तेमाल नहीं होने दिया जाएगा." समाचार माध्यमों के अनुसार प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह का कहना था कि इसका ज़िक्र भारत-पाकिस्तान साझा बयान में भी है और इस बारे में किसी को संदेह नहीं होना चाहिए कि भारत-पाकिस्तान वार्ता को आगे बढ़ाने के लिए यही शर्त है. उनका कहना था कि यदि 'आतंकवादी' गतिविधियों पर काबू नहीं पाया जाता तो किसी भी प्रमुख मुद्दे पर या फिर विश्वास पैदा करने वाले विषयों पर भी बातचीत नहीं हो सकती. |
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