|
मुशर्रफ़ ने मनमोहन को दिया तोहफ़ा | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के प्रधानमंत्री और भारत के राष्ट्रपति जब पहली बार न्यूयॉर्क में मिले तो उनकी गर्मजोशी साफ़ दिखाई दे रही थी. संयुक्त राष्ट्र महासभा में अपने-अपने भाषणों में भी दोनों नेताओं ने बातचीत जारी रखने और रिश्ते सुधारने पर ज़ोर दिया था जिससे इस मुलाक़ात के लिए अच्छा माहौल तैयार हो गया था. भारत के प्रधानमंत्री जब अपने होटल से निकलकर पड़ोस के रूज़वेल्ट होटल में राष्ट्रपति मुशर्रफ़ से मिलने पहुँचे तो उनका बड़े ही जोश के साथ पाकिस्तानी पक्ष ने स्वागत किया. यह भी दिलचस्प बात है कि भारत के प्रधानमंत्री का जन्म पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में गाह नाम के गाँव में हुआ था जबकि पाकिस्तान के राष्ट्रपति परवेज़ मुशर्रफ़ पुरानी दिल्ली में पैदा हुए थे. दोनों नेताओं में इस बात के साझा होने का असर भी दिखा, माहौल में मानवीय संवेदना का पुट देते हुए पाकिस्तान के राष्ट्रपति ने भारतीय प्रधानमंत्री को कई तोहफ़े दिए. ये तोहफ़े ऐसे थे जिनकी मनमोहन सिंह के लिए निजी तौर पर बहुत अहमियत होगी, इसमें कोई शक नहीं है. परवेज़ मुशर्रफ़ ने मनमोहन सिंह को उनके गाँव की एक सुंदर तस्वीर भेंट की जिसे पाकिस्तान के एक मशहूर पेंटर ने बनाया है.
लेकिन सबसे बढ़कर एक सुंदर फ्रेम में मनमोहन सिंह को उनकी दूसरे क्लास की रिपोर्ट कार्ड भेंट की गई, यह गाह के गाँव के उस स्कूल की रिपोर्ट-कार्ड है जिसका नाम अब 'मनमोहन सिंह प्राइमरी स्कूल' रख दिया गया है. उर्दू में तैयार की गई इस रिपोर्ट में दूसरी कक्षा में उस बच्चे को मिले अंकों का विवरण है जो एक प्रख्यात अर्थशास्त्री और भारत का प्रधानमंत्री बना. जब मनमोहन सिंह को यह रिपोर्ट सौंपी गई तो वे काफ़ी भावुक नज़र आए और वे रिपोर्ट को काफ़ी देर तक निहारते रहे. प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और राष्ट्रपति मुशर्रफ़ के चेहरे पर ख़ुशी और एक दूसरे के प्रति शिष्टाचार पहली बार हाथ मिलाने से लेकर उनके संयुक्त बयान जारी किए जाने तक लगातार दिखाई दिया. दोनों नेताओं ने संवाददाता सम्मेलन में जितनी सकारात्मक और उत्साहजनक बातें की हैं उनसे तो यही लगता है कि बंद कमरे में भी हुई बातचीत सौहार्दपूर्ण ही रही होगी. |
| ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||