| 'बातचीत से ठोस नतीजा नहीं निकला है' | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
पाकिस्तान के पूर्व विदेश मंत्री सरताज अज़ीज़ ने इस बात पर थोड़ी निराशा व्यक्त की है कि भारत और पाकिस्तान के बीच जनवरी में शुरू हुई नए दौर की बातचीत के बाद से कोई ठोस नतीजा नहीं निकल पाया है. बीबीसी हिंदी के साप्ताहिक कार्यक्रम आपकी बात बीबीसी के साथ में हिस्सा लेते हुए अज़ीज़ ने कहा कि जनवरी में भारत और पाकिस्तान के बीच इस्लामाबाद में शुरू हुई शांति वार्ता के दौरान कश्मीर विवाद और सुरक्षा सहित कई मुद्दों पर व्यापक बातचीत की शुरुआत हुई थी. इसके बाद 5 और 6 सितंबर को दिल्ली में दोनों देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में इस बातचीत में हुई प्रगति का जायज़ा लिया गया. उन्होंने कहा कि अभी तक की बातचीत के कोई ठोस नतीजे निकल कर नहीं आए. लेकिन उन्होंने बातचीत के माहौल को सकारात्मक और आशावादी बताया. उन्होंने कहा कि इस वक्त यही बात सबसे अहम है कि दोनों ही पक्ष शांति चाहते हैं और यही सफलता की कुंजी बन सकती है. भारत के पूर्व विदेश सचिव शशांक ने भी कार्यक्रम में भाग लेते हुए कहा कि शांति वार्ता की प्रक्रिया आगे बढ़ रही है हालांकि उसमें कुछ दिक़्क़्तें भी हैं. श्रोताओं के सवालों के जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि अच्छी बात ये है कि दोनों ही देशों की सरकारें इन दिक़्क़तों को पार करके शांति प्रक्रिया को आगे बढ़ाने के लिए उत्सुक हैं. उन्होंने कहा कि जिन 8 मुद्दों पर बातचीत आगे बढ़ाने की कोशिश की जा रही है उनमें से कुछ का संबंध सीधे जनता से है जैसे दोनों देशों के नागरिकों को वीज़ा की सुविधा, लोगों की आवाजाही को आसान बनाना, जिससे भटक कर एक दूसरे की सीमा में निकल आए मछुआरों और मासूम नागरिकों को सज़ा न काटनी पड़ें. इसके अलावा आर्थिक मुद्दों पर भी जिस तरह से चर्चा आगे बढ़ी है उसे देखते हुए ये साफ़ है कि शांति प्रक्रिया में तरक़्क़ी हो रही है. बुनियादी बदलाव सरताज अज़ीज़ का ये भी कहना था कि पाकिस्तान की नीतियों में कई महत्वपूर्ण और बुनियादी बदलाव देखने में आए हैं.
उन्होंने कहा कि पिछले 10 सालों से पाकिस्तान का रुख़ ये था कि अगर कश्मीर के मुद्दे पर बात आगे नहीं बढ़ी तो क्षेत्र में स्थायी शांति नहीं हो सकती. लेकिन पिछले दो-तीन महीनों से पाकिस्तान के उस रुख़ में ये बदलाव देखने में आया है कि अब वो वीज़ा, लोगों के आवागमन और आर्थिक मुद्दों सहित कई अन्य जटिल मुद्दों पर भी बातचीत कर रहा है. उन्होंने ये भी कहा कि बातचीत में हो रही प्रगति को देखते हुए ये आशा भी बंधती है कि माहौल और सकारात्मक होगा जिससे कश्मीर सहित अन्य विवादित मुद्दों पर भी बातचीत हो सकेगी. सरताज अज़ीज़ ने भारत के उस सुझाव का भी ज़िक्र किया जिसमें ये कहा गया है कि कश्मीर जैसे विवादित मुद्दे पर बातचीत शुरू करने में समय लग सकता है इसलिए ये ज़रूरी है कि क्षेत्र में हो रही चरमपंथी गतिविधियों पर नज़र रखी जाए, क्योंकि उसके बिना इस्लामाबाद घोषणापत्र को लागू कर पाना मुश्किल हो जाएगा. उन्होंने कहा कि बातचीत जारी रहेगी, शांति प्रक्रिया आगे बढ़ेगी लेकिन उसे सार्थक बनाने के लिए ये ज़रूरी है कि चरमपंथी गतिविधियां बंद की जाएं. |
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