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उमा भारती के मामले की सुनवाई टली | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
मध्य प्रदेश की पूर्व मुख्यमंत्री उमा भारती के ख़िलाफ़ लगे आरोपों को वापस लेने के कर्नाटक सरकार के फ़ैसले पर सुनवाई अब शनिवार को होगी. इस बीच, भारतीय जनता पार्टी ने हुबली में बुधवार को अपना सत्याग्रह आंदोलन शुरू कर दिया, भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी ने हुबली में गिरफ़्तारी दी. थोड़ी देर के बाद उन्हें और भाजपा के अन्य नेताओं को रिहा कर दिया गया. हुबली में कर्फ्यू का उल्लंघन करने और सांप्रदायिक तनाव भड़काने के आरोप लगने के बाद उमा भारती ने मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दे दिया था और इस समय में वे कर्नाटक में न्यायिक हिरासत में हैं. माना जा रहा है कि उनकी रिहाई आज संभव है, उनके मामले की सुनवाई मंगलवार को होनी थी लेकिन हुबली में वकीलों की हड़ताल के कारण इसे एक दिन के लिए मुल्तवी कर दिया गया था. कर्नाटक सरकार ने मंगलवार को घोषणा की थी कि दस वर्ष पहले हुबली में उत्तेजक भाषण देने के मामले में उमा भारती के ख़िलाफ़ लगाए गए आरोप वापस लिए जा रहे हैं. मामला दस साल पहले हुबली मामले में उमा भारती के ख़िलाफ़ ग़ैर ज़मानती वारंट जारी किया गया था और न्यायालय में पेश होने के बाद उन्हें 14 दिन की न्यायिक हिरासत में रखा गया है. कर्नाटक सरकार ने रुख में एक पखवाड़े से भी कम समय में परिवर्तन हुआ है और अपने पुराने निर्णय को पूरी तरह पलटते हुए सरकार ने कहा है कि वह उमा भारती के ख़िलाफ़ मामला वापस लेना चाहती है. सरकार का यह रुख़ सोमवार को उच्च न्यायालय में एक जनहित याचिका की सुनवाई के दौरान सामने आया. धारवाड़ के एक किसान ने जनहित याचिका दायर कर कहा था कि उमा भारती के ख़िलाफ़ चल रहा मामला ख़ारिज कर देना चाहिए. मुख्य न्यायाधीश एन के जैन ने यह याचिका तो ख़ारिज कर दी लेकिन इस पर विचार के दौरान कर्नाटक के महाधिवक्ता बीटी पार्थसारथी ने अदालत से कहा कि वह उमा भारती के ख़िलाफ़ चल रहा मामला वापस लेना चाहती है. इससे पहले कर्नाटक की धरमसिंह सरकार ने अदालत में बाक़ायदा याचिका दायर करके कहा था कि वह उमा भारती के ख़िलाफ़ चल रहा मामला वापस नहीं लेना चाहती जबकि उनकी पूर्ववर्ती एसएम कृष्णा सरकार ने अदालत में अर्ज़ी दे रखी की वह मामला वापस लेना चाहती है. |
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