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पाकिस्तानी से आई बहुओं को नागरिकता का इंतज़ार | ||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
भारत और पाकिस्तान दोनों ही देशों में ऐसे परिवारों की बड़ी संख्या है जो एक दूसरे के साथ अब भी शादी ब्याह का रिश्ता जोड़ना चाहते हैं. हालांकि अब दोनों देशों के रिश्ते सुधर रहे हैं लेकिन एक बड़ी समस्या अब भी सामने है, नागरिकता की. कर्नाटक में ऐसे परिवारों की बड़ी संख्या है. बंगलौर में करीब 20 पाकिस्तानी महिलाओं ने भारतीय नागरिकता के लिए अर्ज़ी दे रखी है. गुजरात के कच्छ इलाके से कई मुसलमान परिवार करीब चार-पाँच सौ साल पहले यहाँ आकर बस गए थे. इन कच्छी मुस्लिम परिवारों के पाकिस्तान के कच्छी मुस्लिम समुदाय के साथ पारिवारिक संबंध हैं. ये लोग अपने आपको मेमन कहते हैं, कन्नड़ भाषा बोलते हैं और कर्नाटक के कपड़ा उद्योग का बड़ा हिस्सा इनके हाथ में है. रिश्तेदार और दोस्तों के पाकिस्तान में रहने से यहां के कुछ कच्छी मुसलमानों के वहाँ से ताल्लुक़ात अच्छे हैं. इसी के चलते यहाँ के कई परिवारों में पाकिस्तान के मेमन समुदाय से लड़कियों को बहु बनाकर लाया गया है. अब ये युवतियाँ भारत की नागरिकता मिलने का इंतज़ार कर रही हैं. फॉरेनर्स रजिस्ट्रेशन ऑफिस (एफआरओ) बंगलौर के अधिकारी जगदीश प्रसाद ने बीबीसी को बताया, "इन महिलाओं को पहले 90 दिन का पर्यटक वीज़ा मिलता है और फिर उन्हें सालाना परमिट लेकर यहाँ रहना पड़ता है. पिछले साल, भारत सरकार ने राज्य सरकारों को आदेश दिया कि लगातार पाँच साल भारत में रहने पर इन पाकिस्तानी महिलाओं को भारतीय नागरिकता लेने के लिए अर्ज़ी देनी होगी." जगदीश प्रसाद ने कहा कि किसी भी पाकिस्तानी नागरिक को परमिट देने से पहले उसके पति और परिवार के बारे में पूरी छानबीन की जाती है. गृह विभाग को यह सुनिश्चित करता पड़ता है कि इनका किसी आपराधिक, ख़ासकर आतंकवादी संगठन के साथ संबंध नहीं है और न ही सांप्रदायिक गतिविधियों से. पुलिस से परेशानी मैने कुछ पाकिस्तानी औरतों और उनके भारतीय पतियों से बात करने की कोशिश की. कुछ ने बात करने से साफ इंकार कर दिया और जिसने की, उसने अपना नाम या तो बदलना पसंद किया या बताने से इंकार कर दिया. अधिकांश लोगों का कहना था कि पुलिस प्रशासन उन्हें कई बार तंग करता है. सही दस्तावेज़ होने पर भी पुलिस के छोटे अधिकारी उनसे पैसे मांगते हैं. रूकसाना के भारतीय पति ने कहा, ''कभी पैसे मांगते हैं तो कभी मोबाइल फोन और कपड़ों की मांग भी की जाती है, साथ में वो धमकी देते हैं कि मांग पूरी न किए जाने पर वो हमारे खिलाफ फर्ज़ी रिपोर्ट तैयार करेंगे कि हमारे आतंकवादी संगठनों या साम्प्रदायिकता फ़ैलाने वाले मदरसों के साथ रिश्ते हैं.'' पाकिस्तानी महिलाओं को एक शहर का वीज़ा मिलता है. वो अपने पति और बच्चों के साथ बिना पुलिस की इज़ाजत के शहर छोड़ नहीं सकतीं. नियमों के तहत उन्हें केवल लिखित में अनुमति लेनी पड़ती है मगर उनका कहना है कि इसके लिए पुलिस उन्हें तंग करती है. हालांकि बंगलौर के पुलिस आयुक्त एम. भरस्वामी ने इन आरोपों का खंडन किया और कहा कि यूरोप के मुकाबले भारत विदेशी नागरिकों के साथ बहुत नरमी से पेश आता है. उनका कहना था कि कुछ लोग कागज़ी कार्रवाई पूरी नहीं करते और फिर पुलिस पर ग़लत आरोप लगाते हैं. उन्होंने कहा कि बंगलौर में सारी सूचना कम्प्यूटर पर उपलब्ध है और उन्हें किसी बात का डर नहीं होना चाहिए. |
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