|
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||
सगाई के चौबीस साल बाद हो पाई शादी
मोरोक्को के एक सैनिक ने अपनी मंगेतर से शादी करली. ख़ास बात यह थी कि मंगनी चौबीस साल पहले हुई थी. दरअसल, पश्चिमी सहारा पर नियंत्रण के लिए हुई लड़ाई के दौरान जब मोरोक्को के हज़ारों सैनिकों को बंदी बनाया गया तो उसमें अब्दुर्रहीम नाम का यह सैनिक भी था. अभी हाल ही में उनमें से कुछ बंदियों को रिहा किया गया है. मोरोक्को टेलीविज़न पर बोलते हुए अब्दुर्रहीम ने कहा कि उन्हें यक़ीन था कि उनकी मंगेतर बाहिया उनका इंतज़ार करेगी. नवंबर में जब वह रिहा हुए तो सीधे बाहिया के पास पहुँचे जो सचमुच इंतज़ार में पलकें बिछाए बैठी थी. बीबीसी के एक संवाददाता के अनुसार अल्जीरिया में पिछले काफ़ी समय से युद्धबंदी बने मोरोक्को के सैनिकों पर हाल ही में दुनिया भर का ध्यान गया है. फ़्रांस के एक मानवाधिकार संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि इन सैनिकों को भूखा रखा जाता है और उन्हें यंत्रणा भी दी जाती है. इस रिपोर्ट के बाद काफ़ी हंगामा मचा और बंदी बनाने वालों से मांग की गई कि वे इन सैनिकों को तुरंत रिहा करें. लेकिन इन युद्धबंदियों के लिए सब कुछ इतना आसान नहीं था. इनमें से कई बूढ़े और अशक्त हो चुके थे और उनमें से कुछ की शिकायत है कि मोरोक्को के अधिकारियों ने उनकी उपेक्षा की. लेकिन कम से कम अब्दुर्रहीम के लिए तो इस कहानी का सुखद अंत रहा. उनकी दुल्हन का कहना है कि उन्हें हमेशा से विश्वास था कि उनका मंगेतर लौटेगा. वह कहती हैं कि उन्होंने अपना दर्द सीने में ही छिपाए रखा. |
| |||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||||